नेपाल के सुपर पीएम बालेन शाह ने 30 दिन में क्या-क्या किया! GenZ को क्यों अखरने लगा है उनका मौन?

Nepal PM Balendra Shah: बालेन सरकार के कुछ फैसलों ने उन्हें अदालती कार्रवाई के घेरे में खड़ा कर दिया। पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को बिना उचित कागजी कार्रवाई के गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया

अपडेटेड Apr 27, 2026 पर 5:44 PM
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बालेन शाह ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 100 सूत्रीय सुधार एजेंडा को मंजूरी देकर धमाकेदार शुरुआत की थी

Balen Shah As Nepal PM: नेपाल की राजनीति में 'बदलाव' का चेहरा बनकर उभरे बालेन शाह को प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाले एक महीना पूरा हो गया है। 27 मार्च को जब उन्होंने कार्यभार संभाला, तो नेपाल के युवाओं खासकर Gen Z को लगा कि दशकों पुरानी पारंपरिक राजनीति का अंत होगा। लेकिन 30 दिनों के भीतर ही बालेन सरकार विवादों, मंत्रियों के इस्तीफे और 'मौन' के आरोपों से घिर गई है।

100 सूत्रीय एजेंडा से की थी शुरुआत

बालेन शाह ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 100 सूत्रीय सुधार एजेंडा को मंजूरी देकर धमाकेदार शुरुआत की थी। उन्होंने संघीय मंत्रालयों के आकार को छोटा करने के साथ घाटे में चल रहे बोर्ड/समितियों का विलय किया। पासपोर्ट, लाइसेंस और नागरिकता दस्तावेजों की होम डिलीवरी डाक के जरिए करने की शुरुआत की। बिजली निर्यात के लिए दीर्घकालिक रणनीति और निवेश सेवाओं का डिजिटलीकरण।


30 दिन में दो मंत्रियों की छुट्टी, साख पर उठे सवाल

बालेन सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक तालमेल रही। एक महीने के भीतर ही दो दिग्गज मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा। श्रम मंत्री दीपक शाह अपनी पत्नी को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में नियुक्त करने के विवाद के बाद वापस बुलाए गए। वहीं गृह मंत्री सुदन गुरुंग एक जांच के दायरे में आए व्यवसायी से कथित संबंधों के चलते इस्तीफा देना पड़ा। युवा मतदाताओं का कहना है कि क्या संसद में कोई सक्षम मंत्री नहीं बचा, जो पद संभाल सके?

'मौन' बालेन और Gen Z की बढ़ती बेचैनी

जिस युवा पीढ़ी और Gen Z वोटर्स ने बालेन को सत्ता तक पहुंचाया, अब वही उनसे सवाल पूछ रहे हैं। पीएम बनने के बाद से बालेन ने न तो राष्ट्र को संबोधित किया है और न ही कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। अपनी पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने पर लगे 'कोऑपरेटिव स्कैम' के आरोपों पर बालेन की चुप्पी युवाओं को अखर रही है। पीएम कार्यालय तक पहुंच अब और कठिन हो गई है, जिसे लेकर 'अकाउंटेबिलिटी' पर सवाल उठ रहे हैं।

बिना कागजी कार्रवाई के गिरफ्तारियां

बालेन सरकार के कुछ फैसलों ने उन्हें अदालती कार्रवाई के घेरे में खड़ा कर दिया। पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को बिना उचित कागजी कार्रवाई के गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। नदियों के किनारे बसे अतिक्रमणकारियों को हटाने की कोशिशों पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं कि पुनर्वास की कोई ठोस योजना नहीं थी।

अर्थव्यवस्था और बॉर्डर का तनाव

नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने एक महीने में ईंधन की कीमतों में करीब 50 नेपाली रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। खुली सीमा पर नियमों को कड़ा करने से व्यापार प्रभावित हुआ है और सीमावर्ती इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। चुनाव में वादा किया गया था कि युवाओं का विदेश पलायन रुकेगा, लेकिन जमीन पर अब तक कोई बड़ा कदम नहीं दिखा है।

हालांकि हर तरफ आलोचना नहीं है। काठमांडू के युवाओं का कहना है कि सरकारी दफ्तर अब सुबह जल्दी खुल रहे हैं और देर तक काम हो रहा है। ड्राइविंग लाइसेंस के बैकलॉग को खत्म करने में भी तेजी आई है। साथ ही, बालेन ने विदेशी राजदूतों से एक-एक कर मिलने के बजाय सामूहिक बैठक कर कूटनीति में एक नया ट्रेंड सेट किया है।

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