Nepal Border: नेपाल बॉर्डर पर चिप्स के पैकेट पर हुआ 'बवाल'! कस्टम ड्यूटी को लेकर PM बालेन शाह के खिलाफ फूटा गुस्सा

Nepal PM Balen Shah Protests: नेपाल सरकार ने भारत से आने वाले सामान पर सीमा शुल्क नियमों को सख्ती से लागू कर दिया है। अब भारत से 100 नेपाली रुपये यानी करीब 63 भारतीय रुपये से ज्यादा कीमत का कोई भी सामान लाने पर अनिवार्य सीमा शुल्क देना होगा। सामान के आधार पर यह टैक्स 5% से लेकर 80% तक हो सकता है

अपडेटेड Apr 23, 2026 पर 9:39 AM
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पीएम बालेन शाह केवल सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि एक और मोर्चे पर घिरे हुए हैं

Nepal Border Crisis: नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के कार्यभार संभालने के एक महीने के भीतर ही उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। विरोध प्रदर्शन के पीछे की वजह है भारत से आने वाले सामान पर सख्त 'कस्टम ड्यूटी' का नियम। आलम यह है कि बच्चों के लिए चिप्स का पैकेट लाने पर भी पुलिस उन्हें जब्त कर रही है, जिसे लोग 'अघोषित नाकेबंदी' बता रहे हैं। बीते दो-तीन दिनों से भारत-नेपाल बॉर्डर पर भारी तनातनी देखने को मिल रही है।

₹63 से ज्यादा के सामान पर लगेगा टैक्स

नेपाल सरकार ने भारत से आने वाले सामान पर सीमा शुल्क नियमों को सख्ती से लागू कर दिया है। अब भारत से 100 नेपाली रुपये यानी करीब 63 भारतीय रुपये से ज्यादा कीमत का कोई भी सामान लाने पर अनिवार्य सीमा शुल्क देना होगा। सामान के आधार पर यह टैक्स 5% से लेकर 80% तक हो सकता है। इस नए टैक्स से सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग, जो दाल-चावल, दवाई और कपड़ों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर थे, अब भारी वित्तीय बोझ तले दब गए हैं।


इस फैसले का विरोध केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि बालेन शाह की अपनी पार्टी 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' (RSP) के भीतर भी हो रहा है। पार्टी नेता राजीव झा ने 100 रुपये की सीमा को इस महंगाई के दौर में 'अव्यवहारिक' बताया है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

'चिप्स के पैकेट' के लिए पुलिस से भिड़ी महिला

सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जहां नेपाली नागरिक सीमा सुरक्षाकर्मियों से बहस कर रहे हैं। एक महिला अपने बच्चों के लिए 4-5 चिप्स के पैकेट लेकर आ रही थी, जिसे पुलिस ने रोक लिया। महिला ने गुस्से में कहा, 'अगर जब्त करना है तो मुझे इसके पैसे दो, पूरे नेपाल की दुकानों में भारतीय सामान भरा है, पहले उन्हें रोको।' वीडियो में पुलिस कर्मी बेबस नजर आए और उन्होंने कहा कि वे सिर्फ ऊपर से मिले 'ऑर्डर' का पालन कर रहे हैं।

'1950 की संधि का उल्लंघन': क्या है विरोध की वजह?

राष्ट्रीय एकता दल के अध्यक्ष विनय यादव ने इसे 'अघोषित नाकेबंदी' करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह कदम 1950 की भारत-नेपाल शांति और मैत्री संधि के प्रावधानों के खिलाफ है। एक तरफ सरकार का कहना है कि लोग सारा सामान भारत से खरीदते हैं, जिससे नेपाल के स्थानीय दुकानदारों को नुकसान होता है और देश के राजस्व में कमी आती है। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नेपाल में सामान महंगा है और खाद जैसी जरूरी चीजें भी समय पर नहीं मिलतीं, इसलिए वे भारत पर निर्भर हैं।

स्टूडेंट यूनियंस पर बैन ने भी भड़काई आग

पीएम बालेन शाह केवल सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि एक और मोर्चे पर घिरे हुए हैं। उन्होंने नेपाल के विश्वविद्यालयों में राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संघों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके विरोध में छात्र संगठनों ने काठमांडू में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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