Nicolas Maduro: एक बस ड्राइवर जो बना वेनेजुएला का राष्ट्रपति, भारतीय गुरु सत्य साईं के बहुत बड़े भक्त, हमेशा रहे शाकाहारी
US Attacks Venezuela: वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने जवाब में अमेरिका से मादुरो के "जिंदा होने का सबूत" मांगा, और कहा कि उन्हें राष्ट्रपति या उनकी पत्नी के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। एक अमेरिकी सीनेटर का दावा है कि मार्को रुबियो ने कहा कि मादुरो को अमेरिका में मुकदमे के लिए गिरफ्तार किया गया है
Nicolas Maduro: एक बस ड्राइवर जो बना वेनेजुएला का राष्ट्रपति
शनिवार तड़के अमेरिका ने वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिससे काराकास और दूसरे शहरों में विस्फोट हुए और एक बड़ा राजनीतिक और सैन्य संकट पैदा हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाद में दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी, सिलिया फ्लोरेस को अमेरिकी सेना ने पकड़ लिया और ऑपरेशन के बाद उन्हें देश से बाहर ले जाया गया।
वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने जवाब में अमेरिका से मादुरो के "जिंदा होने का सबूत" मांगा, और कहा कि उन्हें राष्ट्रपति या उनकी पत्नी के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। एक अमेरिकी सीनेटर का दावा है कि मार्को रुबियो ने कहा कि मादुरो को अमेरिका में मुकदमे के लिए गिरफ्तार किया गया है।
अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उन्हें बताया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना ने अमेरिका में आपराधिक आरोपों के तहत मुकदमे के लिए गिरफ्तार किया है।
वाशिंगटन के शीर्ष राजनयिक से बातचीत के बाद ली ने X पर लिखा, "मादुरो के अमेरिकी हिरासत में होने के बाद, रुबियो को वेनेजुएला में आगे कोई कार्रवाई की उम्मीद नहीं है।"
बस ड्राइवर से राष्ट्रपति बनने तक का सफर
निकोलस मादुरो का जन्म 23 नवंबर, 1962 को वेनेजुएला की राजधानी कराकास के पास के 'लॉस चागुआरामोस'में हुआ। मादुरो एक बेहद ही साधारण परिवार में जन्में थे। उन्होंने एल वैले के जोस एवालोस हाई स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई की।
मादुरो ने कभी यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी नहीं की। उन्होंने हाई स्कूल के बाद सीधे काम करना और ट्रेड यूनियन की राजनीति शुरू कर दी थी।
मादुरो पहले कराकास में बतौर बस ड्राइवर काम करते थे और बाद में ट्रांजिट वर्कर्स यूनियन के नेता बने, यहीं से उनकी राजनीति की शुरुआत हुई। उन्होंने बस ड्राइवरों की एक अनौपचारिक यूनियन बनाई थी, जिसने उन्हें एक कुशल वक्ता और संगठक के रूप में पहचान दिलाई।
अपनी जवानी के दिनों में वे क्यूबा में राजनीतिक आयोजक के रूप में ट्रेनिंग ले चुके थे, जिसने उन्हें वामपंथी राजनीति और कास्त्रो शासन के करीब ला दिया।
आगे चल कर वे वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज सबसे भरोसेमंद सहयोगी बने। इसी कड़ी में मादुरो पहले विदेशी मंत्री, नेशनल असेंबली के अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति जैसे अहम पदों पर रहे, उसके बाद ही राष्ट्रपति बने।
मादुरो और उनके अनोखे काम और बातें
2013 में राष्ट्रपति बनने के कुछ महीनों बाद मादुरो ने एक अनोखा विभाग बनाया, जिसका नाम रखा गया “वाइस मिनिस्ट्री ऑफ सुप्रीम हैप्पीनेस”, जिसका काम सामाजिक योजनाओं का समन्वय करना था।
मादुरो ने एक बार दावा किया था कि उनके पूर्ववर्ती नेता ह्यूगो चावे एक 'छोटी चिड़िया' के रूप में उनके पास आए और उन्हें आशीर्वाद दिया।
उन्होंने एक बार ये भी कहा था कि वे अक्सर ह्यूगो चावेज की समाधि के पास जाकर सोते हैं, ताकि वे उनसे आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।
मादुरो के बारे में एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि वे शाकाहारी हैं। उनके आध्यात्मिक झुकाव और भारतीय गुरुओं के प्रति आस्था ने उनकी खान-पान की आदतों को भी प्रभावित किया है।
सत्य साईं बाबा के भक्त मादुरो
राष्ट्रपति बनने से बहुत पहले, मादुरो ने भारत आए, तब वे राजनीति के लिए नहीं, बल्कि अपने गुरु का आशीर्वाद लेने के लिए यहां आए थे। 2005 में, विदेश मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, वह और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी गए थे। उन्होंने प्रशांति निलयम आश्रम का दौरा किया, जहां कथित तौर पर उन्हें सत्य साई बाबा से निजी मुलाकात का अवसर मिला। इस यात्रा की दुर्लभ तस्वीरों में मादुरो को पारंपरिक भारतीय शैली में विनम्रतापूर्वक जमीन पर बैठे गुरु का प्रवचन सुनते हुए दिखाया गया है।
मिराफ्लोर्स पैलेस आने वाले मेहमान राष्ट्रपति के निजी दफ्तर की सजावट देखकर अक्सर हैरान रह जाते थे। साइमन बोलिवर और ह्यूगो चावेज की क्रांतिकारी तस्वीरों के बीच मादुरो ने भारतीय संत सत्य साईं बाबा की बड़ी फ्रेम वाली तस्वीर को सम्मानजनक जगह पर रखा था।
निकोलस मादुरो सत्य साईं का चरणों में बैठे हुए (FILE PHOTO)
रिपोर्ट के अनुसार, कथित तौर पर असहमति को कुचलने वाले मादुरो ने 13 सालों तक भारतीय आध्यात्मिक संत की निगरानी में निर्णय लिए, जो "सभी से प्रेम करो, सभी की सेवा करो" का उपदेश देते थे।
सत्य साईं के निधन पर वेनेजुएला में राष्ट्रीय शोक
सत्य साईं के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स के जरिए हुआ था। कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि सिलिया मादुरो से कहीं पहले सत्य साईं बाबा की भक्त थीं। शासन की "आयरन लेडी" कहलाने वाली सिलिया ने कई तख्तापलट की कोशिशों के दौरान मादुरो को साईं बाबा के "धैर्य" और "भाग्य" के उपदेशों से सलाह दी।
जब अप्रैल 2011 में सत्य साईं बाबा का निधन हुआ, तो वेनेजुएला ने ऐसा कदम उठाया जो लैटिन अमेरिका का कोई दूसरा देश नहीं उठा पाया। तब मादुरो विदेश मंत्री थे और उनके प्रभाव में वेनेजुएला की नेशनल असेंबली ने आधिकारिक शोक प्रस्ताव पारित किया। उन्होंने राष्ट्रीय शोक का दिन घोषित किया और भारतीय गुरु के "मानवता के लिए आध्यात्मिक योगदान" और वेनेजुएला की जनता पर उनके प्रभाव को औपचारिक रूप से मान्यता दी।
वेनेजुएला में खूब फला-फूला सत्य साईं संगठन
दो महीने पहले, 23 नवंबर 2025 को, मादुरो ने अपनी राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर गुरु की शताब्दी मनाई। उन्होंने आधिकारिक बयान जारी कर साईं बाबा को "प्रकाश का स्वरूप" कहा और लिखा, "मैं हमेशा उन्हें याद करता हूं, जब हम मिले थे... इस महान शिक्षक की बुद्धि हमें हमेशा रोशन करती रहे।" यह उनके शासन ढहने से पहले का आखिरी गैर-राजनीतिक काम था।
मादुरो के संरक्षण में वेनेज़ुएला में सत्य साईं संगठन ने खूब विकास किया, जबकि दूसरे विदेशी NGO को देश से निकाल दिया गया। लैटिन अमेरिका में भक्तों की सबसे बड़ी संख्या वाले देशों में वेनेज़ुएला शामिल है, जहां 1974 में काराकास में पहला केंद्र स्थापित हुआ था। शासन ने इन केंद्रों को स्कूल चलाने और "मानव मूल्य संस्थान" खोलने की छूट दी, जिससे आध्यात्मिक आंदोलन को "सॉफ्ट पावर" की ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया।
मादुरो को क्यों कहा जाता है तानाशाह?
मादुरो की मुख्य आलोचना आर्थिक संकट, निरंकुश शासन और भ्रष्टाचार को लेकर होती है। उनके नेतृत्व में वेनेजुएला में हाइपरइन्फ्लेशन, भोजन-दवा की भारी कमी और बेरोजगारी बढ़ी, जिससे लाखों लोग देश छोड़ चुके हैं। तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था को सही ढंग से न संभालने और खर्च न घटाने से संकट गहराया।
विपक्षी प्रदर्शनों को सेना के जरिए कुचलना, असहमति दबाना और चुनावों में धांधली के आरोप लगते रहे। मानवाधिकार उल्लंघन, जैसे हिरासत में हत्याएं और WhatsApp जैसे मैसेज पर जेल, आम हो गए।
मादुरो ने कई बार डिक्री के जरिये शासन किया है, यानी संसद की सामान्य प्रक्रिया को दरकिनार करके सीधे राष्ट्रपति आदेशों से फैसले लिए, जिसकी विपक्ष ने कड़ी आलोचना की।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि उन नेताओं में रही है, जो अमेरिका-विरोधी धुरी के करीब हैं। उन्होंने लीबिया के मुआम्मर गद्दाफी, जिम्बाब्वे के रॉबर्ट मुगाबे और ईरान के अहमदीनेजाद जैसे विवादित नेताओं से घनिष्ठ संबंध बनाए।