Israel Attack: ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के आठवें दिन पहली बार अमेरिका और इजरायल के बीच गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। दरअसल इजरायल ने शनिवार को एक ही दिन में ईरान के 30 फ्यूल डिपो पर एक के बाद एक हमले किए। उन भीषण हमलों ने वाशिंगटन को हैरान और परेशान कर दिया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि वे इस बात से हैरान थे कि हमले इतने व्यापक होंगे। अमेरिका ने इसे 'एक गलत कदम' करार दिया है।
हमलों के नजारों से वाशिंगटन हैरान
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सेना ने फ्यूल डिपो पर हमले से पहले अमेरिका को सूचना तो दी थी, लेकिन हमलों का दायरा उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा निकला। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि वे इस बात से हैरान थे कि हमले का असर इतने बड़े पैमाने पर होगा। उन्होंने इस फैसले को 'एक बुरा विचार' बताया है। एक इजरायली अधिकारी के अनुसार, वाशिंगटन का संदेश बेहद सख्त था, जिसे उन्होंने 'WTF' के रूप में बतलाया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सलाहकार ने कहा, 'राष्ट्रपति को यह हमला पसंद नहीं आया। वे तेल को बचाना चाहते हैं, जलाना नहीं। ऐसे दृश्यों से लोगों को बढ़ती महंगाई और पेट्रोल की कीमतों की याद आती है।'
इजरायली सेना (IDF) ने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा, इन डिपो का इस्तेमाल ईरानी सेना के अंगों को ईंधन आपूर्ति के लिए किया जाता था। इजरायल का कहना है कि यह हमला ईरान के लिए एक संकेत है कि वह इजरायल के नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बंद करे।
तेहरान में हुई 'काली बारिश'
इजरायली हवाई हमलों के बाद तेहरान में एक डरावना मंजर देखा गया। तेल डिपो में लगी भीषण आग से निकले धुएं के कण बादलों के साथ मिल गए। जब तेहरान में बारिश हुई, तो वह 'काली बारिश' के रूप में गिरी। इस जहरीली बारिश ने सड़कों, कारों और छतों को काले अवशेषों से ढक दिया है, जिससे राजधानी में स्वास्थ्य और पर्यावरण का संकट खड़ा हो गया है।
अमेरिका और इजरायल के बीच इस खींचतान की कई वजहें है। अमेरिका को डर है कि आम जनता के काम आने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने से ईरानी जनता सरकार के खिलाफ होने के बजाय, उसके समर्थन में खड़ी हो जाएगी।हालांकि निशाना तेल उत्पादन केंद्र नहीं थे, लेकिन जलते हुए डिपो के वीडियो वैश्विक बाजार को डरा सकते हैं। ऐसे हमलों से तेल बाजार में हड़कंप मच सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी के तेल ठिकानों को निशाना बनाया, तो कीमतें $200 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।