Crude Oil Crisis: अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज के बंद होने से उपजे वैश्विक तेल संकट के बीच एक और बेहद चिंताजनक खबर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ने रूसी कच्चे तेल की खरीद पर दी गई अस्थाई प्रतिबंध में मिली छूट को रिन्यू करने से इनकार कर दिया है, जिससे यह छूट समाप्त हो गई है। भारत के लिए ये एक बड़ा झटका है क्योंकि मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत को रूस से निर्बाध रूप से तेल मिल रहा था।
अमेरिका के इस कदम से वैश्विक तेल बाजार ने एक बड़ा 'सेफ्टी वॉल्व' यानी राहत का जरिया खो दिया है, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका बढ़ गई है।
क्या थी यह छूट और क्यों हुई खत्म?
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूसी तेल पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। हालांकि, मार्च 2026 में ईरान युद्ध शुरू होने और होर्मुज ब्लॉकेड होने के बाद वैश्विक बाजार में तेल की भारी किल्लत हो गई थी।
बाजार को संतुलित करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने मार्च में एक विशेष छूट दी थी, जिसे 16 मई तक बढ़ाया गया था। यह छूट केवल उन रूसी तेल टैंकरों पर लागू थी जो पहले से समुद्र में लोड हो चुके थे।
वैसे यूरोपीय देश इस छूट का लगातार विरोध कर रहे थे। उनका मानना था कि तेल बिक्री से मिलने वाला पैसा रूस के युद्ध फंड को मजबूत कर रहा है। इसी दबाव के बीच अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने शनिवार को इस छूट की अवधि को आगे नहीं बढ़ाया।
भारत और एशिया के देशों की बढ़ी मुश्किलें
इस फैसले से भारत और इंडोनेशिया जैसे एशियाई देशों को बड़ा झटका लगा है, जो होर्मुज संकट के कारण कच्चे तेल के लिए रूस पर निर्भरता बढ़ा रहे थे। ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई ठप होने के बाद, भारत की कुल तेल खरीद में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50% से अधिक हो चुकी थी। भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी 'यूराल्स' (Urals) ग्रेड तेल सबसे बड़ा सहारा बना हुआ था।
भारत सहित कई देशों ने इस प्रतिबंध छूट को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से पैरवी की थी, लेकिन अमेरिकी सांसदों के विरोध के आगे ट्रंप प्रशासन पीछे हट गया।
होर्मुज संकट से दुनिया को लगा इतिहास का सबसे बड़ा एनर्जी शॉक
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने वर्तमान हालात को वैश्विक तेल बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा 'सप्लाई व्यवधान' करार दिया है। होर्मुज जलमार्ग के प्रभावी रूप से बंद होने से रोजाना लाखों बैरल कच्चे तेल की आवाजाही ठप है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
वैसे तेल के झटके से निपटने के लिए ट्रंप प्रशासन ने घरेलू स्तर पर कुछ नियमों में ढील दी है, जैसे कि विदेशी जहाजों को अमेरिकी बंदरगाहों के बीच तेल ले जाने की अनुमति देना।