Asim Munir: दुनिया के सबसे बड़े सुरक्षा मंचों में से एक 'म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन' (MSC) में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को एक असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। जर्मनी में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल इवेंट में सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया और आईडी दिखाने को कहा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसे पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक शर्मिंदगी के तौर पर देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही जनरल असीम मुनीर कार्यक्रम स्थल के भीतर जाने की कोशिश करते हैं, वहां तैनात सुरक्षाकर्मी उन्हें टोक देते हैं। वीडियो में एक सुरक्षा अधिकारी को साफ तौर पर कहते सुना जा सकता है, 'रुकिए... आपकी आईडी कहां है? कृपया अपना आईडी कार्ड पलटकर दिखाएं।' न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, मुनीर के साथ वहां मौजूद किसी भी अन्य आम अतिथि की तरह व्यवहार किया गया और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत उनसे पहचान पत्र मांगा गया।
'कोई उन्हें नहीं जानता', सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस घटना ने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है। पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी आदिल राजा ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर 'उन्हें कोई नहीं जानता'। उन्होंने आरोप लगाया कि मुनीर इतने अनजान हैं कि उन्हें गेटकीपरों को भी अपना परिचय देना पड़ता है। हालांकि, कुछ लोगों का तर्क है कि इस तरह के बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सुरक्षा जांच एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
वेन्यू के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन
असीम मुनीर की मुश्किलें सिर्फ अंदर की जांच तक सीमित नहीं रहीं। कॉन्फ्रेंस वेन्यू के बाहर जर्मनी स्थित सिंधी राजनीतिक संगठन 'जीय सिंध मुत्तहिदा महाज' (JSMM) ने उनके खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के अध्यक्ष शफी बुरफत ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और जर्मन सरकार को पत्र लिखकर मुनीर को आमंत्रित किए जाने पर गहरा दुख और खेद जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे सैन्य अधिकारी को बुलाना 'बेहद अफसोसजनक' है जिसका इतिहास मानवाधिकारों के उल्लंघन से भरा है।
पाकिस्तान सेना पर लगाए गंभीर आरोप
JSMM ने अपने बयान में पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 1971 के बांग्लादेश नरसंहार से लेकर सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में जबरन गायब किए जाने और हत्याओं का मुद्दा उठाया। संगठन ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की सेना वहां की राजनीति और न्यायपालिका पर अनुचित दबाव डालती है। उन्होंने इमरान खान की जेल और बेनजीर भुट्टो जैसी पूर्व नेताओं की हत्याओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सेना की मौजूदगी क्षेत्रीय अस्थिरता का बड़ा कारण है।