Get App

US-Iran Ceasefire: पाकिस्तान की अगुवाई में हुआ अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर समझौता, मध्यस्थता के बदले आखिर क्या चाहता है इस्लामाबाद? जानिए

US Iran Ceasefire-Pakistan: इस पूरे समझौते की सबसे बड़ी कड़ी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' है। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि असली चुनौती तब आएगी जब यह देखा जाएगा कि क्या ईरान जहाजों को बिना किसी बाधा या 'टैक्स' के वहां से गुजरने देता है। अगर ईरान ने वहां जहाजों को धमकाया या वसूली की कोशिश की, तो यह सीजफायर तुरंत टूट सकता है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Apr 08, 2026 पर 11:56 AM
US-Iran Ceasefire: पाकिस्तान की अगुवाई में हुआ अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर समझौता, मध्यस्थता के बदले आखिर क्या चाहता है इस्लामाबाद? जानिए
एक्सपर्ट्स का मानना है कि, पाकिस्तान की इस मध्यस्थता के पीछे उसकी कोई बड़ी रणनीतिक मांग जरूर होगी

Pakistan Role In Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के संघर्ष विराम से दुनिया को युद्ध की तपिश थोड़ी राहत मिली है। वैसे इस चौंकाने वाले समझौते में पाकिस्तान एक बड़े मध्यस्थ के रूप में उभरा है। हालांकि, इजरायल ने भी वाशिंगटन के इस फैसले का समर्थन किया है, लेकिन पाकिस्तान की इस सक्रियता ने कई कूटनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।

पाकिस्तान की भूमिका पर उठ रहे सवाल

विशेषज्ञों के लिए पाकिस्तान का व्हाइट हाउस और ईरान के बीच 'दूत' बनना काफी 'अजीब' है। 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' के कार्यकारी निदेशक जोनाथन शैनजर के मुताबिक, पाकिस्तान पर चीन का भारी कर्ज है। ऐसे में सवाल यह है कि, क्या पाकिस्तान अमेरिका से दोस्ती बढ़ाकर अपने गठबंधन का दायरा बढ़ाना चाहता है? या फिर वह पर्दे के पीछे से चीन के इशारे पर काम कर रहा है?

शैनजर का कहना है कि पाकिस्तान इस मदद के बदले में क्या चाहता है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके पीछे उसकी कोई बड़ी रणनीतिक मांग जरूर होगी।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें