ईरान युद्ध कब खत्म होगा? इसकी नई भविष्यवाणी लेकर आए पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, इजरायल का एक राज भी खोल दिया!

US Israel Attack Iran: एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने न सिर्फ युद्ध के दोबारा शुरू न होने की गारंटी दी, बल्कि इसके पीछे इजरायल का एक बड़ा राज भी खोल दिया। उन्होंने बताया कि इजरायल इस समय 'बेचैनी' से जंग दोबारा शुरू करना चाहता है, लेकिन अमेरिका के हाथ आखिर क्यों बंधे हुए हैं

अपडेटेड May 19, 2026 पर 2:13 PM
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ख्वाजा आसिफ ने कहा अमेरिकी लोग नहीं चाहते कि ट्रंप आगे बढ़कर इजरायल की जंग लड़े

Khawaja Asif Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी बारूद के खेल और कच्चे तेल की नाकेबंदी के बीच पूरी दुनिया सिर्फ एक ही सवाल का जवाब ढूंढ रही है कि आखिर ईरान युद्ध कब खत्म होगा? इस महासंकट के बीच अब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ एक बेहद चौंकाने वाला दावा और नई 'भविष्यवाणी' लेकर सामने आए हैं।

पाकिस्तानी न्यूज चैनल 'जियो न्यूज' को दिए एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने न सिर्फ युद्ध के दोबारा शुरू न होने की गारंटी दी, बल्कि इसके पीछे इजरायल का एक बड़ा राज भी खोल दिया। उन्होंने बताया कि इजरायल इस समय 'बेचैनी' से जंग दोबारा शुरू करना चाहता है, लेकिन अमेरिका के हाथ आखिर क्यों बंधे हुए हैं और क्यों राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी ही जनता के दबाव के आगे झुककर मिसाइल हमलों को आखिरी वक्त में टालना पड़ा है।

'इजरायल के लिए अपनी सेना नहीं झोंकेगा अमेरिका'


ख्वाजा आसिफ ने इंटरव्यू के दौरान साफ शब्दों में कहा कि भले ही इजरायल कुछ देशों पर हमला करना चाहता है, लेकिन अमेरिकी जनता अब किसी और देश की लड़ाई में अपने सैनिकों को नहीं झोंकना चाहती। उन्होंने कहा, 'अमेरिकी जनता की राय इस मामले में बेहद साफ है। लोग नहीं चाहते कि अमेरिका आगे बढ़कर इजरायल की जंग लड़े। इतिहास गवाह है कि जनता के समर्थन के बिना कोई भी देश लंबे समय तक युद्ध नहीं लड़ सकता।'

ईरान का नया प्रस्ताव और ट्रंप का यू-टर्न

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने एक नया शांति प्रस्ताव भेजा है। इसके बाद ट्रंप ने भी अपने सख्त तेवरों को थोड़ा ढीला करते हुए ईरान पर होने वाले नए सैन्य हमलों को फिलहाल टाल दिया है ताकि कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ सके।

राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा था कि इस समय दोनों पक्षों के बीच बेहद गंभीर बातचीत चल रही है। ट्रंप के मुताबिक, 'खाड़ी देशों और सहयोगियों की राय में एक ऐसा समझौता तैयार किया जा सकता है जो अमेरिका के साथ-साथ पूरे मिडिल ईस्ट के देशों के लिए स्वीकार्य होगा। लेकिन इस समझौते में पहली शर्त यही होगी कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।'

6 हफ्तों की भीषण जंग के बाद सहमी है दुनिया

बता दें कि पिछले दिनों अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच करीब 6 हफ्तों तक चले भीषण मिसाइल और हवाई हमलों के बाद इस क्षेत्र में सीजफायर लागू है। इस जंग के दौरान ईरान द्वारा कच्चे तेल की सप्लाई करने वाले सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते 'होर्मुज' को ब्लॉक कर दिए जाने से पूरी दुनिया में ईंधन का संकट खड़ा हो गया था और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई थीं।

चीन-रूस समेत ये देश नहीं चाहते तबाही

ख्वाजा आसिफ ने बताया कि केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि उसके सभी 'भाईचारे वाले देश' जैसे सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत, चीन और रूस भी यही चाहते हैं कि ईरान में दोबारा युद्ध की तबाही न लौटे।

इस पूरे विवाद में पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। वह अमेरिका की ट्रंप सरकार की गुड-बुक्स में भी बने रहना चाहता है और साथ ही अपने मित्र मुस्लिम देशों के साथ भी रिश्ते खराब नहीं करना चाहता, इसलिए वह दोनों पक्षों के बीच संदेशों को इधर से उधर पहुंचाने का काम कर रहा है।

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