सरकार नहीं, सेना चलाती है देश! रक्षा मंत्री ने खुद कबूला- पाकिस्तान में लोकतंत्र सिर्फ दिखावा

यह एक हफ्ते में दूसरी बार है, जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के मंत्री आसिफ ने हाइब्रिड व्यवस्था की मौजूदगी को स्वीकार किया है। विश्लेषक लंबे समय से इस व्यवस्था की आलोचना करते रहे हैं और इसे वास्तविक पवर शेयरिंग मॉडल के बजाय "सहायक हितों की पूर्ति के लिए स्थापित एक निश्चित सरकार" बताते रहे हैं

अपडेटेड Jun 21, 2025 पर 11:21 PM
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रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुद कबूला- पाकिस्तान में लोकतंत्र सिर्फ दिखावा

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री और नवाज शरीफ के करीबी सहयोगी ख्वाजा आसिफ ने पहली बार सार्वजनिक रूप से कबूल किया है कि देश में "हाइब्रिड मॉडल" की सरकार चल रही है, जिसमें सेना की मजबूत भूमिका है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब लोकतंत्र और सत्ता के असली केंद्र को लेकर पाकिस्तान में बहस फिर से गरमा गई है। यह एक हफ्ते में दूसरी बार है, जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के मंत्री आसिफ ने हाइब्रिड व्यवस्था की मौजूदगी को स्वीकार किया है। विश्लेषक लंबे समय से इस व्यवस्था की आलोचना करते रहे हैं और इसे वास्तविक पवर शेयरिंग मॉडल के बजाय "सहायक हितों की पूर्ति के लिए स्थापित एक निश्चित सरकार" बताते रहे हैं।

सेना और सरकार की साझेदारी को बताया "जरूरी मॉडल"

अरब न्यूज को दिए गए इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा, "यह एक हाइब्रिड मॉडल है, कोई आदर्श लोकतांत्रिक सरकार नहीं। लेकिन इस समय यह सिस्टम देश के लिए जरूरी है, जब तक पाकिस्तान आर्थिक और प्रशासनिक संकटों से बाहर नहीं निकलता।"


उन्होंने दावा किया कि अगर 1990 के दशक में नवाज शरीफ की सरकार के समय ऐसा मॉडल लागू होता, तो सेना और सिविल सरकार के बीच टकराव टल सकता था और लोकतंत्र को नुकसान नहीं होता।

बेटे का नाम नहीं, सेना से समझौता ही रास्ता

आसिफ ने यह भी साफ किया कि PML-N और शरीफ परिवार के पास सेना के साथ समझौते के अलावा कोई "वास्तविक विकल्प" नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि नवाज शरीफ के बेटे मौजूदा उत्तराधिकार लिस्ट में नहीं हैं, जिससे यह भी साफ होता है कि अब रणनीति बदली जा रही है।

ट्रंप और पाक आर्मी चीफ की मुलाकात पर भी दिया बयान

आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर हाल ही में अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले। इस मुलाकात को आसिफ ने "78 साल के रिश्तों का सबसे अहम मोड़" बताया और इसका श्रेय भी उन्होंने हाइब्रिड सिस्टम को दिया।

ख्वाजा आसिफ के इस खुले बयान के बाद PML-N की "वोट को इज्जत दो" की पुरानी नीति पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि अब पार्टी ने खुद को पूरी तरह सेना के अधीन कर लिया है।

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. रसूल बख्श रईस ने कहा, "अब यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान की सत्ता का असली केंद्र कहां है। सरकार सिर्फ दिखावटी चेहरा है, असली फैसले सेना कर रही है।"

उन्होंने इसे "हाइब्रिड नहीं, बल्कि फिक्स्ड सरकार" बताया, जो सिर्फ सेना और सत्ता में बैठे गठजोड़ के हितों की सेवा कर रही है।

"तीसरी बार चला हाइब्रिड सिस्टम"

डॉ. रईस ने कहा कि इमरान खान को 2022 में हटाए जाने के बाद यह तीसरी बार है, जब सेना समर्थित सरकार सत्ता में है, लेकिन इस बार PML-N और PPP जैसी बड़ी पार्टियां खुद इस सिस्टम का हिस्सा बन गई हैं, जो पहले जनरल जिया और परवेज मुशर्रफ के दौर में नहीं हुआ था।

उन्होंने कहा कि अब शरीफ और ज़रदारी, दोनों का उद्देश्य सिर्फ एक है, "इमरान खान की पार्टी PTI को पूरी तरह खत्म करना, जिसे दोनों के लिए खतरा माना जा रहा है।"

वरिष्ठ पत्रकार मातिउल्लाह जान ने इस बयान पर ट्वीट करते हुए लिखा, "एक नेता की ऐसी गिरावट दुर्भाग्यपूर्ण है। जो मंत्री संविधान की रक्षा की शपथ लेता है, वह अब 'हाइब्रिड सिस्टम' की तारीफ कर रहा है, जो संविधान में कहीं नहीं लिखा।"

उन्होंने आगे कहा, "यह कोई हाइब्रिड नहीं, बल्कि सीधी-सादी तानाशाही है, जिसमें छोटे नेता सिर्फ सेना की कठपुतली हैं।"

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