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Pakistan's Economic Survey: मार्च तक कर्ज बढ़कर हुआ 76000 अरब पाकिस्तानी रुपये, 2.7% की रफ्तार से बढ़ सकती है अर्थव्यवस्था

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार अगले वित्त वर्ष में 4.2% की ग्रोथ रेट का लक्ष्य बना रही है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में पाकिस्तान का वित्तीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 2.6% था। 9 महीनों में पाकिस्तान का चालू खाता सरप्लस 1.9 अरब डॉलर था

Edited By: Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jun 09, 2025 पर 11:26 PM
Pakistan's Economic Survey: मार्च तक कर्ज बढ़कर हुआ 76000 अरब पाकिस्तानी रुपये, 2.7% की रफ्तार से बढ़ सकती है अर्थव्यवस्था
पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक ऋण अब 76,007 अरब पाकिस्तानी रुपये है।

पाकिस्तान की सरकार 10 जून को बजट पेश करने वाली है। इससे एक दिन पहले 9 जून को पाकिस्तानी वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने आर्थिक सर्वे 2024-25 पेश किया। यह खत्म हो रहे वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का लेखाजोखा होता है। पाकिस्तान का वित्त वर्ष 1 जुलाई-30 जून तक रहता है। पड़ोसी मुल्क के आर्थिक सर्वे से पता चला है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले वित्त वर्ष 2.5% की दर से बढ़ी। अब 30 जून 2025 को खत्म होने जा रहे वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के 2.7% की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है।

पाकिस्तान की सरकार ने शुरू में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद में 3.6% की वृद्धि का लक्ष्य रखा था। लेकिन पिछले महीने इसे घटाकर 2.7% कर दिया। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड को पाकिस्तान की इकोनॉमिक ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष में 2.6% और अगले वित्त वर्ष में 3.6% रहने की उम्मीद है। आर्थिक सर्वेक्षण में निर्यात में 7% की वृद्धि की बात कही गई है। पाकिस्तान का आईटी निर्यात 3.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। रेमिटेंस बढ़कर 38 अरब डॉलर हो गया।

सरकार को अगले वित्त वर्ष में 4.2% की ग्रोथ रेट की उम्मीद

रॉयटर्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार अगले वित्त वर्ष में 4.2% की ग्रोथ रेट का लक्ष्य बना रही है। इसमें निवेश को बढ़ावा देना, प्राइमरी सरप्लस बरकरार रखना और भारत के साथ तनाव के बीच रक्षा खर्च को मैनेज करना शामिल है। पाकिस्तानी वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा कि वह नहीं चाहते कि अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़े, जिसके कारण अतीत में आयात में उछाल आया है। औरंगजेब के मुताबिक, "जैसे ही हम खपत-बेस्ड विकास की ओर बढ़ते हैं, हमारा आयात गड़बड़ा जाता है और हमारे भुगतान संतुलन की समस्या तेज हो जाती है। यह पूरी चर्चा को पटरी से उतार देता है।"

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