पाकिस्तान की सियासत में इस समय एक बहुत बड़ा भूचाल आया हुआ है। देश के सबसे रसूखदार और ताकतवर धार्मिक-राजनीतिक नेताओं में शुमार मौलाना फजलुर रहमान (Maulana Fazlur Rehman) ने अपनी जान को खतरा बताते हुए एक ऐसा बयान दिया है जिसने बवाल मचा दिया है। इस बयान ने सीधे तौर पर पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कराची में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने खुलेआम दहाड़ते हुए कहा कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और अगर कल को उनकी हत्या होती है, तो इसके लिए सीधा जिम्मेदार वहां का एस्टेब्लिशमें' यानी देश की मिलिट्री होगी।
मौलाना फजलुर रहमान के इस हालिया बयान ने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। जेयूआई-एफ के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने इस बात का सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार डराने-धमकाने वाले फोन कॉल्स और चिट्ठियां भेजी जा रही हैं।
हाइब्रिड शासन और विदेश नीति पर तीखा प्रहार
अपनी इस जनसभा के दौरान वरिष्ठ मौलाना ने पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक दिशा और उसकी कमजोर विदेश नीति की भी चौतरफा आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समय पूरा पाकिस्तान एक सिविल-मिलिट्री हाइब्रिड शासन के तहत बंधक बनकर रह गया है, जहां नागरिक सरकार के साथ मिलकर सैन्य प्रतिष्ठान पर्दे के पीछे से सब कुछ संभाल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने सीमा की सुरक्षा और पड़ोसी देशों से रिश्तों पर बात करते हुए दावा किया कि सरकार की नकारात्मक नीतियों के कारण ही इस समय भारत और अफगानिस्तान दोनों के साथ पाकिस्तान के संबंध पूरी तरह खराब हो चुके हैं। इससे दोनों देशों की सीमाएं व्यावहारिक रूप से बंद पड़ी हैं। उन्होंने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि अब चीन जैसी महाशक्ति भी पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करती है।
मुस्लिम प्रतिरोध और गाजा मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय अपील
इस घरेलू राजनीतिक बयानबाजी के बीच मौलाना फजलुर रहमान ने खुद को इस पूरे क्षेत्र में मुस्लिम राजनीतिक प्रतिरोध की एक बड़ी आवाज के रूप में स्थापित करने की भी कोशिश की। उन्होंने गाजा में चल रहे मौजूदा संघर्ष और युद्ध का हवाला देते हुए इजरायल की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि इजरायल इस समय पूरे क्षेत्र में अपनी आक्रामकता का विस्तार कर रहा है। इसके खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए उन्होंने अरब देशों से एक मजबूत इस्लामिक ब्लॉक बनाने का पुरजोर आग्रह किया। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आगे चलकर खुद पाकिस्तान के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
महंगाई और सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान
अपनी सुरक्षा के दावों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात करने के साथ ही मौलाना फजलुर रहमान ने शहबाज सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए एक बड़े आंदोलन का बिगुल भी फूंक दिया है। उन्होंने देश में बेकाबू हो चुकी रिकॉर्डतोड़ महंगाई, सरकार की नाकाम घरेलू नीतियों और विफल विदेश नीति के खिलाफ आगामी 22 मई से एक बड़े देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आंदोलन की शुरुआत करने का आधिकारिक ऐलान किया है।
इमरान खान के आरोपों से मेल खाती कड़ियां
मौलाना फजलुर रहमान द्वारा सैन्य प्रतिष्ठान पर लगाए गए ये आरोप बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि यह ठीक उसी तरह के आरोप हैं जो जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई द्वारा लगातार लगाए जाते रहे हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी भी लगातार पाकिस्तान की मिलिट्री पर राजनीति में दखल देने, पॉलिटिकल इंजीनियरिंग करने और विपक्षी नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोप लगाती आई है। पाकिस्तान की सेना को वहां की सबसे शक्तिशाली संस्था माना जाता है और आलोचक हमेशा से यह कहते आए हैं कि वहां की नागरिक राजनीति हमेशा सैन्य नेतृत्व द्वारा तय की गई सीमाओं के भीतर ही काम करती है।
इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहे सुरक्षा विश्लेषकों का हालांकि कुछ और ही मानना है। विश्लेषकों का कहना है कि मौलाना फजलुर रहमान एक बेहद अनुभवी और मंझे हुए विपक्षी राजनेता हैं। वह अच्छी तरह जानते हैं कि देश में चल रही राजनीतिक अस्थिरता के दौर में सरकार पर दबाव कैसे बनाया जाता है। विश्लेषक मानते हैं कि मौलाना अक्सर अपने पारंपरिक और रूढ़िवादी देवबंदी समर्थक आधार को एकजुट करने और अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत बनाए रखने के लिए इस तरह की बेहद आक्रामक बयानबाजी का सहारा लेते हैं ताकि सरकार और एस्टेब्लिशमेंट दोनों को बैकफुट पर लाया जा सके।