US-Iran Negotiations: दुनिया की नजरें इस वक्त पाकिस्तान और उसकी हाई-प्रोफाइल कूटनीति पर टिकी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले वीकेंड हुई बातचीत में भले ही कोई बड़ा 'ब्रेकथ्रू' न मिला हो, लेकिन पाकिस्तान हार मानने को तैयार नहीं है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने दोनों कट्टर दुश्मनों को फिर से मेज पर लाने के लिए अपनी कोशिशें दोगुनी कर दी हैं।
'इस्लामाबाद टॉक्स' के बाद अब 'इस्लामाबाद प्रोसेस'
पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों ने बातचीत को लेकर अपना नजरिया बदल दिया है, जो एक बड़े कूटनीतिक बदलाव का संकेत है। अब इसे केवल 'इस्लामाबाद टॉक्स' नहीं, बल्कि 'इस्लामाबाद प्रोसेस' यानी एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया कहा जा रहा है।अधिकारियों का मानना है कि इस 'रीब्रैंडिंग' से यह संदेश जाएगा कि कूटनीति का रास्ता बंद नहीं हुआ है, बल्कि यह एक लंबी प्रक्रिया की शुरुआत है।
क्या फिर होगी आमने-सामने की मुलाकात?
भले ही तनाव चरम पर है, लेकिन पर्दे के पीछे से आ रही खबरें कुछ और ही इशारा कर रही हैं। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी अगले हफ्ते सीजफायर खत्म होने से पहले ईरान के साथ एक और 'इन-पर्सन' यानी आमने-सामने मीटिंग की गुपचुप तैयारी कर रहे हैं। हालांकि अभी कुछ भी तय नहीं है, लेकिन अगर कूटनीतिक दबाव काम करता है, तो बहुत जल्द दूसरी मुलाकात की तारीख और जगह का ऐलान हो सकता है।
नाकेबंदी और धमकियों के बीच चल रहे कूटनीति प्रयास
आज, 14 अप्रैल से अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी है, जिसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों के बंदरगाहों पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। इन सबके बावजूद, एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि ईरान के साथ जुड़ाव जारी है और समझौते की दिशा में सकारात्मक प्रगति देखी जा रही है।पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी पुष्टि की है कि संघर्ष को सुलझाने के प्रयास अभी भी जारी हैं।
$100 के पार पहुंचा कच्चा तेल का भाव
डिप्लोमेसी की कोशिशों के बीच ग्लोबल मार्केट्स में डर का माहौल बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें फिर से $100 प्रति बैरल के पार चली गई हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जल्द खुलने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा व्यवधान है। निवेशकों को डर है कि दो हफ्ते का यह नाजुक सीजफायर कभी भी टूट सकता है।