Pakistan Water Crisis: पानी के लिए तरसने वाला है पाकिस्तान? गहरा रहा जल संकट, भारत से पंगा पड़ रहा भारी

Pakistan Water Crisis : भारत पहले ही सिंधु जल समझौते को सस्‍पेंड कर चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत जल प्रवाह को रोकता या मोड़ता है, तो पंजाब और सिंध के कृषि क्षेत्रों में 35% तक जल कमी हो सकती है।

अपडेटेड Jul 29, 2025 पर 5:29 PM
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Pakistan Water Crisis : सिंधु जल संधि पर रोक के बाद पहली बारिश में ही तड़पने लगा पाकिस्तान

Pakistan Water Crisis : आंतक और आतंकियों के लिए जन्नत बने पाकिस्तान के अब रोने के दिन आ गए हैं। पाकिस्तान के लिए पानी एक बड़ी मुसीबत बन चुका है।  पाकिस्तान इस समय भीषण बाढ़ के संकट से जूझ रहा है। इस साल बाढ़ ने अब तक कम से कम 242 लोगों की जान ले ली है। लेकिन पाकिस्तान के भविष्य की तस्वीर और भी खतरनाक है। आने वाले समय में पाकिस्तान बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेगा। अंतरराष्‍ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है, भारत पहले ही सिंधु जल समझौते को सस्‍पेंड कर चुका है।

अभी बाढ़ मचा रही है तबाही

पाकिस्तान इन दिनों तेज और अनियमित बारिश के कारण आई भयंकर शहरी बाढ़ से जूझ रहा है। 2024 और 2025 में देश के कई बड़े शहरों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई और हज़ारों लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए। 2025 में हाल ही में आई बाढ़ की एक नई लहर में अब तक कम से कम 242 लोगों की जान जा चुकी है, और आने वाले तूफ़ानों से हालात और बिगड़ने की आशंका है। ये बाढ़ जहां भारी तबाही ला रही हैं, वहीं यह एक बड़ी चूक को भी सामने लाती हैं - बारिश के पानी को संजोने में नाकामी। पाकिस्तान में बाँधों की कमी और शहरों में खराब जल प्रबंधन की वजह से बारिश का पानी बचाया नहीं जा रहा, बल्कि बर्बाद हो रहा है।

बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान


एक्सपर्ट लगातार चेतावनी देते आ रहे हैं कि साउथ एशिया में अब बाढ़ और सूखा बारी-बारी से आते रहेंगे। यहां के शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाकों में पानी की कमी लगातार है। वॉटर पॉवर्टी इंडेक्स के मुताबिक पाकिस्तान फिलहाल दुनिया में 15वां ऐसा देश है, जहां पानी की कमी है। वहीं, एक अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन के मुताबिक साल 2035 तक पाकिस्तान पानी के लिए तरसने वाली हालत में आ जाएगा।

क्या कहती है रिपोर्ट

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF-P) के अनुसार, 1947 में जहाँ प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगभग 5,600 घन मीटर थी, वहीं 2023 में यह घटकर सिर्फ 930 घन मीटर रह गई है जो संकट के स्तर से भी नीचे है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) का कहना है कि पाकिस्तान में जल संकट दुनिया में सबसे गंभीर है और अब पानी की सुरक्षा देश के अस्तित्व से जुड़ा सवाल बन चुकी है। सीधे शब्दों में कहें, तो पाकिस्तान एक बेहद गंभीर जल संकट की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

भारत से पंगा लेना पड़ा भारी

वहीं भारत द्वारा किशनगंगा और रतले जैसे बड़े बांधों के निर्माण ने पाकिस्‍तान को टेंशन दे दी है। भारत पहले ही सिंधु जल समझौते को सस्‍पेंड कर चुका है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत जल प्रवाह को रोकता या मोड़ता है, तो पंजाब और सिंध के कृषि क्षेत्रों में 35% तक जल कमी हो सकती है।

पाकिस्तान में जल संकट और जलवायु परिवर्तन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स के अनुसार, भले ही पाकिस्तान दुनिया के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में बहुत कम योगदान देता है, फिर भी यह जलवायु परिवर्तन से सबसे ज़्यादा प्रभावित 10 देशों में शामिल है। विश्व बैंक के एक आकलन के मुताबिक, अगर यही रुझान जारी रहे, तो 2090 तक पाकिस्तान का औसत तापमान 4.9 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इससे और ज़्यादा मौसम से जुड़ी अस्थिरता आ सकती है।

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