'फौरन तनाव कम करने की जरूरत', पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर मैक्रों से की बात

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की। दोनों नेताओं ने तुरंत तनाव कम करने, संवाद शुरू करने और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Mar 19, 2026 पर 5:39 PM
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात में तनाव कम करने के लिए तुरंत संवाद और कूटनीति की जरूरत है। (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर बात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात में तनाव कम करने के लिए तुरंत संवाद और कूटनीति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए भारत और फ्रांस मिलकर काम करेंगे।

मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा, 'मेरे प्रिय मित्र राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से पश्चिम एशिया की स्थिति पर बातचीत हुई। हमने तनाव कम करने की जरूरत और संवाद व कूटनीति की ओर लौटने पर जोर दिया। क्षेत्र और उससे आगे शांति और स्थिरता के लिए हम अपना करीबी तालमेल जारी रखेंगे।'


ईरान के हमले के बाद मैक्रों की चिंता

मैक्रों की यह टिप्पणी उस समय आई है, जब ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है। ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ की बैठक में पहुंचने पर उन्होंने इस स्थिति को 'खतरनाक तरीके से बढ़ता तनाव' बताया।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऊर्जा उत्पादन से जुड़े ढांचे को नुकसान पहुंचता है, तो इस युद्ध का असर लंबे समय तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की अपील

मैक्रों ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद की भी जरूरत बताई। हालांकि ईरान ने उनके बयान की आलोचना की।

तेहरान का कहना है कि मैक्रों ने इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना नहीं की, लेकिन ईरान की जवाबी कार्रवाई पर चिंता जताई है।

भारत ने बढ़ाए कूटनीतिक संपर्क

मैक्रों से बातचीत से एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं से भी बात की थी। इस दौरान पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और समुद्री व्यापार को लेकर चर्चा हुई।

भारत ने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही पर जोर दिया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

दरअसल, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस रास्ते को अवरुद्ध कर रखा है, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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