Saudi Arabia: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब सऊदी अरब ने अमेरिका के सख्त रुख पर चिंता जताई है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने अमेरिका पर दबाव डाला है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की समुद्री नाकेबंदी को तुरंत खत्म करे और ईरान के साथ बातचीत की मेज पर लौटे। दरअसल सऊदी अरब का मानना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई आग में घी डालने का काम कर रही है और इससे दुनिया भर के शिपिंग रूट्स पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
आखिर क्यों डरा हुआ है सऊदी अरब?
सऊदी अरब की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर ईरान को होर्मुज में दबाया गया, तो वह जवाबी कार्रवाई के लिए लाल सागर को चुन सकता है। होर्मुज की नाकेबंदी के बाद सऊदी अरब ने अपना तेल पाइपलाइनों के जरिए रेड सी की तरफ मोड़ दिया है। अब उसे डर है कि ईरान अपने सहयोगी हुती विद्रोहियों के जरिए बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को निशाना बना सकता है। अगर बाब अल-मंडेब बंद होता है, तो सऊदी अरब के पास तेल निर्यात का कोई भी सुरक्षित रास्ता नहीं बचेगा।
सऊदी अरब इस समय फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। एक तरफ सऊदी अरब अमेरिका से बातचीत की वकालत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह हुती विद्रोहियों के संपर्क में भी है ताकि रेड सी में उसके जहाजों पर हमले न हों। सऊदी अरब यह भी नहीं चाहता कि युद्ध इस तरह खत्म हो कि होर्मुज पर ईरान का पूरा कंट्रोल बना रहे। वह एक ऐसा समाधान चाहता है जहां समुद्री रास्ते सभी के लिए सुरक्षित हों।
नाकेबंदी कर ईरान की कमर तोड़ना चाहता है अमेरिका
सोमवार से लागू हुई अमेरिकी नाकेबंदी का उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना है। ईरान पहले ही होर्मुज में जहाजों पर हमले करके वैश्विक तेल आपूर्ति में रोजाना 1.3 करोड़ बैरल की कटौती कर चुका है। इस तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
ईरान ने दी 'बदले' की धमकी
ईरानी मीडिया और अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अगर उनके बंदरगाहों को खतरा पहुंचा, तो क्षेत्र के अन्य बंदरगाह भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान अपने सहयोगी समूहों का इस्तेमाल करके सऊदी अरब के एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय बंदरगाहों पर हमले तेज कर सकता है।
होर्मुज और बाब अल-मंडेब की क्या है अहमियत
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक है जहां से वैश्विक तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। वहीं बाब अल-मंडेब स्वेज नहर के जरिए एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का मुख्य रास्ता है। यहां से रोजाना करीब 93 लाख बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं। ये दोनों रास्ते पूरी दुनिया में एनर्जी सप्लाई के लिए बेहद जरूरी है। इन रास्तों पर रुकावट का मतलब है दुनिया की एनर्जी सिक्योरिटी और खाड़ी के देशों की अर्थव्यवस्था पर खतरा। यही वजह है कि सऊदी अरब सहित खाड़ी एक अन्य देश अमेरिकी नाकेबंदी को लेकर काफी चिंतित दिख रहे है।