Trump Tariff: टैरिफ 90 दिन टालने के ट्रंप के फैसले में स्कॉट बेसेंट की बड़ी भूमिका, जानिए कौन हैं बेसेंट

62 साल के Scott Bessent अमेरिका के वित्त मंत्री हैं। उन्हें ट्रंप को समझाने के लिए काफी मशक्क्त करनी पड़ी। पहले तो ट्रंप इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन, फाइनेंशियल मार्केट्स की तेजी से बदलती स्थितियों को देख वह तैयार हो गए

अपडेटेड Apr 12, 2025 पर 3:07 PM
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बेसेंट ने अपना करियर 1991 में जॉर्ज सोरोस के हेज फंड में शुरू किया था।

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 अप्रैल को एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि रेसिप्रोकल टैरिफ 90 दिनों के लिए टाल दिया गया है। इस खबर से अमेरिकी स्टॉक मार्केट को पंख लग गए। पूरी दुनिया ने भी राहत की सांस ली। ट्रंप के टैरिफ की तलवार अब भी लटक रही है, लेकिन 90 दिनों की राहत ने समस्या के समाधान की बड़ी उम्मीद जगा दी है। सवाल है कि आखिर ट्रंप का मन अचानक कैसे बदल गया? सूत्रों की मानें तो इसमें अमेरिकी फाइनेंस मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट की बड़ी भूमिका है। ट्रंप उन पर काफी भरोसा करते हैं। उनकी बातें गौर से सुनते हैं। टैरिफ कुछ दिन टालने की बेसेंट की सलाह ट्रंप को ठीक लगी। फिर, 9 अप्रैल की सुबह उन्होंने इसका ऐलान कर दिया।

बेसेंट आखिरकार ट्रंप को मनाने में सफल रहे

62 साल के Scott Bessent को ट्रंप को समझाने के लिए काफी मशक्क्त करनी पड़ी। पहले तो ट्रंप इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन, फाइनेंशियल मार्केट्स की तेजी से बदलती स्थितियों को देख वह तैयार हो गए। स्टॉक मार्केट्स में बड़ी गिरावट से बेपरवाह ट्रंप को बॉन्ड्स की कीमतों में आई गिरावट ने रुख बदलने को मजबूर कर दिया। अगर अमेरिकी बॉन्ड्स पर लोगों का भरोसा घटा तो न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा पैदा हो जाता। ट्रंप इसके लिए तैयार नहीं थे। बेसेंट अपनी कोशिश में कामयाब रहे।


अमेरिकी बॉन्ड्स में बड़ी बिकवाली ने ट्रंप को डराया

बेसेंट के पुराने दोस्तों में से एक सेन लिंडसे ग्राहम ने कहा कि अगर ट्रंप के इस दांव के अच्छे नतीजें आए तो इस फैसले की तारीफ होगी। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसे बड़ी गलती मानी जाएगी। हालांकि, टैरिफ को 90 दिनों के टालने के बाद भी स्टॉक मार्केट्स पर दबाव कम होता नहीं दिख रहा। उधर, अमेरिकी बॉन्ड्स की यील्ड हाई बनी हुई है। ट्रंप ने जिस टैरिफ की शुरुआत अमेरिकी इकोनॉमी को मजबूत बनाने के लिए की थी, वह अमेरिका और चीन के बीच टकराव बढ़ाने वाली वजह बन गया है। चीन और अमेरिका के बीच का यह टकराव आगे क्या रूप लेगा, यह बताना मुश्किल है।

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1991 में हेज फंड से शुरू किया था करियर

बेसेंट ने अपना करियर 1991 में जॉर्ज सोरोस के हेज फंड में शुरू किया था। एक साल बाद ब्रिटिश पौंड पर सोरोस के सफल दांव में उनकी बड़ी भूमिका थी। फाइनेंस और पॉलिटिक्स को लेकर बेसेंट की सोच काफी व्यावहारिक रही है। वह अमेरिका पर बढ़ते कर्ज को लेकर चिंतित रहे हैं। यही वजह है कि 2024 में राष्ट्रपति चुनाव के ट्रंप के प्रचार अभियान से उन्होंने जुड़ने का फैसला कियाा। ट्रंप के करीबी लोगों का यह मानना है कि ट्रंप बेसेंट को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि वह टीवी पर काफी अच्छे दिखते हैं।

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