Shehbaz Sharif: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश की विदेशी ऋणों पर बढ़ती निर्भरता और जर्जर अर्थव्यवस्था पर गहरा दुख व्यक्त किया है। इस्लामाबाद में निर्यातकों और व्यापारिक नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि बार-बार वित्तीय सहायता के लिए हाथ फैलाना राष्ट्रीय सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने खुले तौर पर कहा कि जब वे और सैन्य प्रमुख विदेशी दौरों पर आर्थिक मदद मांगते हैं, तो उन्हें व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर भारी शर्मिंदगी महसूस होती है।
'हाइब्रिड शासन' से सेना की बढ़ती भूमिका
शहबाज शरीफ ने देश के अस्तित्व को बनाए रखने का श्रेय 'हाइब्रिड शासन' को दिया, जिसमें सेना शासन के केंद्र में है। उन्होंने अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सेना की 'शत-प्रतिशत' भूमिका की सराहना की। शरीफ के अनुसार, पेट्रोल तस्करी रोकने और चीनी उद्योग को संभालने में सेना का बड़ा हाथ रहा है। मुनीर की 'चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज' के रूप में पदोन्नति के बाद, अब सेना का नियंत्रण परमाणु कमान सहित सभी सैन्य शाखाओं पर है, जिसे प्रधानमंत्री ने एक 'साझेदारी' करार दिया।
पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली से तांडव
प्रधानमंत्री के बयानों ने पाकिस्तान की जमीनी हकीकत को फिर से उजागर कर दिया है:
गरीबी का स्तर: 2018 में जो गरीबी 21.9% थी, वह अब बढ़कर 45% तक पहुंच गई है।
अत्यधिक गरीबी: लगभग 16.5% जनसंख्या अब अत्यधिक गरीबी की श्रेणी में है।
बेरोजगारी: देश में बेरोजगारी की दर 7.1% हो गई है, जिससे 80 लाख से अधिक नागरिक बेरोजगार हैं।
एक्सपोर्ट में भारी कमी: पाकिस्तान का निर्यात अभी भी केवल टेक्सटाइल तक सीमित है, जबकि सॉफ्टवेयर और कृषि जैसे क्षेत्र लगातार पिछड़ रहे है।
विदेशी 'मित्रों' और IMF पर है निर्भरता
शरीफ ने चीन, सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे 'हर मौसम के साथियों' का आभार व्यक्त किया। चीन ने CPEC के जरिए अरबों डॉलर का निवेश किया है, वहीं सऊदी अरब और यूएई ने तेल भुगतान और ऊर्जा परियोजनाओं में बड़ी मदद दी है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान अब अपने 23वें IMF कार्यक्रम पर है और नए कर्ज केवल पुराने कर्जों का ब्याज चुकाने में इस्तेमाल हो रहे हैं। जब तक टैक्स सुधार और घरेलू उद्योगों में नवाचार नहीं होगा, यह ऋण चक्र खत्म होना मुश्किल है।