Solar Eclipse 2026: साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा इस दिन, भारत में नहीं दिखाई देगा आग का छल्ला

Solar Eclipse 2026: साल 2026 का दूसरा महीना यानी फरवरी खगोल शास्त्र में रुचि रखने वाले लोगों के लिए काफी दिलचस्प होगा। साल का पहला ग्रहण, वलयाकार सूर्य ग्रहण इसी माह में घटित होगा। ये ग्रहण 17 फरवरी को होगा, लेकिन इसे भारत में नहीं देखा जा सकेगा। आइए जानें इसके बारे में

अपडेटेड Jan 19, 2026 पर 7:35 PM
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रिंग ऑफ फायर का अद्भुत और दुर्लभ नजारा करीब 2 मिनट 20 सेकंड तक देखा जा सकेगा।

Solar Eclipse 2026: साल 2026 के दूसरे महीने, फरवरी में खगोलशास्त्रियों को वलयाकार सूर्य ग्रहण का बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिलेगा। ये वलयाकार सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को होगा, भारत छोड़ दुनिया के कई अन्य देशों में देखा जा सकेगा। एक खास बात यह भी है कि जिस दिन यह ग्रहण लगेगा, उसी दिन चीनी चंद्र नव वर्ष भी मनाया जाएगा। भारत में सूर्य ग्रहण खगोलीय रूप से महत्वपूर्ण होने के साथ ही धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी काफी अहम होता है। भारत में ग्रहण काल को शुभ समय नहीं माना जाता है। ग्रहण के कई घंटे पहले सूतक काल लग जाता है, जिसमें धार्मिक कार्य नहीं किए जाते और मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन, साल का ये पहला सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए इसका सूतक मान्य नहीं होगा। आइए जानें इस ग्रहण के बारे में

सूर्य ग्रहण का समय

17 फरवरी 2026 को लगने वाले इस ग्रहण का टाइम शेड्यूल इस प्रकार है :

शुरुआत : शाम 5 बजकर 26 मिनट पर।

समापन : शाम 7 बजकर 57 मिनट पर।

अद्भुत और दुर्लभ होगा नजारा


साल का पहला सूर्य ग्रहण अद्भुत और दुर्लभ होगा। साल का पहला सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण। ग्रहण के दौरान चंद्रमा, सूर्य के लगभग 96% भाग को ढक लेगा। चूंकि, चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाएगा, इसलिए सूर्य का बाहरी किनारा एक चमकती हुई अंगूठी की तरह नजर आएगा, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' के नाम से जाना जाता है।

रिंग ऑफ फायर का समय

रिंग ऑफ फायर का अद्भुत और दुर्लभ नजारा करीब 2 मिनट 20 सेकंड तक देखा जा सकेगा। आसमान में आग का ऐसा छल्ला दिखाई देगा, जिसमें से लपटें निकल रही होंगी।

क्या होता है वलयाकार सूर्य ग्रहण?

वलयाकार सूर्य ग्रहण को 'रिंग ऑफ फायर' के नाम से भी जाना जाता है। हम सभी जानते हैं कि सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा घूमते हुए सूरज और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। इससे सूरज की रोशनी धरती पर नहीं आ पाती है। वहीं, 'वलयाकार ग्रहण' की स्थिति थोड़ी अलग होती है। दरअसल, पृथ्वी की परिक्रमा करते समय चंद्रमा की दूरी बदलती रहती है। जब चंद्रमा पृथ्वी से दूर होता है, तो वह आकार में छोटा दिखाई देता है। ऐसे में, जब वह सूर्य के बीच में आता है, तो वह उसे पूरी तरह ढक नहीं पाता। इस वजह से सूर्य के किनारे दिखाई देते रहते हैं, जो आसमान में एक 'आग के छल्ले' की तरह नजर आते हैं।

भारत में नहीं दिखाई देगा यह ग्रहण?

भारत में रहने वाले खगोल प्रेमियों को इस खबर से निराशा हो सकती है, क्योंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

किन देशों में दिखेगा यह नजारा?

यह ग्रहण मुख्य रूप से दुनिया के दक्षिणी हिस्सों में दिखाई देगा। जिन स्थानों पर इस खगोलीय घटना को देखा जा सकेगा, वे हैं :

  • प्रमुख देश : दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना, चिली, तंजानिया, नामीबिया, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक, मेडागास्कर और बोत्सवाना।
  • अन्य क्षेत्र : अंटार्कटिका, मॉरीशस, दक्षिणी जॉर्जिया, ब्रिटिश इंडियन ओशन क्षेत्र और फ्रांसीसी दक्षिणी क्षेत्र।

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