'होर्मुज स्ट्रेट बंद रहना चाहिए' ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की अमेरिका को खुली धमकी- मारे गए लोगों का बदला लिया जाएगा

US Iran War: खामेनेई ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका के सैन्य ठिकाने अभी भी इलाके में सक्रिय रहते हैं, तो उन पर हमला किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को जल्द से जल्द अपने सैन्य ठिकाने बंद कर देने चाहिए, क्योंकि अब यह साफ हो चुका है कि अमेरिका का शांति और सुरक्षा लाने का दावा “सिर्फ झूठ” था

अपडेटेड Mar 12, 2026 पर 9:01 PM
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ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की अमेरिका को खुली धमकी- मारे गए लोगों का बदला लिया जाएगा

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपनी नियुक्ति के बाद पहली बार बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए बंद रखना चाहिए और क्षेत्र में हमले जारी रहेंगे। उनका बयान गुरुवार को ईरान के सरकारी टीवी पर एक न्यूज एंकर ने पढ़कर सुनाया। खामेनेई खुद कैमरे पर दिखाई नहीं दिए।

खामेनेई ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका के सैन्य ठिकाने अभी भी इलाके में सक्रिय रहते हैं, तो उन पर हमला किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को जल्द से जल्द अपने सैन्य ठिकाने बंद कर देने चाहिए, क्योंकि अब यह साफ हो चुका है कि अमेरिका का शांति और सुरक्षा लाने का दावा “सिर्फ झूठ” था।

ईरान के नए नेता ने यह भी कहा कि युद्ध में मारे गए लोगों का बदला जरूर लिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान अपने दुश्मनों से युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा भी लेगा। अगर दुश्मन मुआवजा नहीं देते, तो ईरान उनके संसाधनों को नष्ट कर सकता है या उनसे जबरन वसूल सकता है।


खामेनेई ने कहा कि अभी तक बदले की कार्रवाई का सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही हुआ है और जब तक पूरा बदला नहीं लिया जाता, यह ईरान की प्राथमिकता बना रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान कभी पीछे नहीं हटेगा और पूरी ताकत के साथ मुकाबला करेगा। साथ ही उन्होंने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई और युद्ध में मारे गए हर नागरिक का बदला लेने की बात कही।

अपने पिता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मौत से यह साबित होता है कि वह हमेशा सच बोलते थे और एक मजबूत नेता थे। उन्होंने कहा कि वह अपने पिता के रास्ते पर ही चलेंगे और “शहीदों के खून का बदला” कभी नहीं भूलेंगे।

खामेनेई ने क्षेत्र में ईरान के सहयोगी समूहों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने खास तौर पर यमन के हूती, लेबनान के हिजबुल्ला और इराक में मौजूद सहयोगी संगठनों का जिक्र करते हुए उन्हें “रेजिस्टेंस फ्रंट” के लड़ाके बताया।

युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की तीन शर्तें

इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी युद्ध खत्म करने के लिए तीन शर्तें रखी हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते के लिए सबसे पहले ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता देनी होगी। दूसरी शर्त यह है कि भविष्य में ईरान पर हमला नहीं किया जाएगा, इसकी अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए। तीसरी शर्त यह है कि युद्ध में हुए नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाए।

ईरान की ‘आर्थिक जवाबी कार्रवाई’

इसी बीच फारस की खाड़ी में जहाजों और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि अमेरिका और इज़रायल अपने हमले रोक दें।

ईरान का कहना है कि जब तक उसे भविष्य में हमले न होने की ठोस सुरक्षा गारंटी नहीं मिलती, तब तक उसकी जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी। इससे संकेत मिलता है कि अगर युद्धविराम भी हो जाए, तब भी तनाव पूरी तरह खत्म होना मुश्किल हो सकता है।

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