Trump On Russian Oil: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध के बीच IRGC ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी कर दी है। इसकी वजह से दुनिया भर में तेल संकट गहराता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को एक बड़ी राहत दी है। अमेरिका ने भारत को अगले 30 दिनों तक रूस से तेल खरीदना जारी रखने के लिए विशेष छूट दी है। ट्रंप का कहना है कि यह फैसला भारत और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहे भारी दबाव को कम करने के लिए लिया गया है।
'हमारे पास बहुत तेल है': ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा, 'मैंने यह फैसला सिर्फ इसलिए लिया है ताकि दबाव थोड़ा कम हो सके... हमारे पास बहुत तेल है, हमारे देश के पास जबरदस्त भंडार है और दुनिया में भी काफी तेल मौजूद है।' इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया X पर जानकारी दी थी कि भारतीय रिफाइनरियों को वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए यह 30 दिनों की अस्थायी छूट दी जा रही है। बेसेंट ने भारत को अमेरिका का 'साथी' बताया, लेकिन साथ ही यह उम्मीद भी जताई कि भारत भविष्य में अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ाएगा।
क्यों पैदा हुआ वैश्विक तेल संकट?
ईरान युद्ध के नौवें दिन, 2 मार्च से होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण दुनिया भर में हाहाकार मचा है। कच्चा तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिसमें 10-15% का उछाल आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ब्लॉकेड जारी रहा, तो कीमतें 100 से 150 डॉलर तक जा सकती हैं। फिलहाल इस समुद्री रास्ते पर 150 से ज्यादा टैंकर फंसे हुए हैं और तेल की आवाजाही 70 से 100% तक गिर गई है।
सप्लाई चेन पर पड़ा भीषण असर
मिडिल ईस्ट के युद्ध ने तेल के साथ-साथ गैस की सप्लाई को भी पंगु बना दिया है। कतर ने अपना उत्पादन रोक दिया है क्योंकि उसका 90% निर्यात इसी रास्ते से होता है। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे एशियाई देश इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। सऊदी अरब की 'रास तनुरा' रिफाइनरी बंद हो गई है, यूएई की 'फुजैराह' फैसिलिटी में आग लग गई है और इराक ने अपने उत्पादन में 15 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती की है।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है। होर्मुज के बंद होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी। अमेरिका द्वारा दी गई यह 30 दिनों की छूट भारत को रूस से सस्ता तेल खरीदने का मौका देगी, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह एक अस्थायी व्यवस्था है अगर युद्ध जारी रहता है तो भारत को अन्य वैकल्पिक इंतजाम करने होंगे।