US-Iran War: 'हमारे बिना वो कागजी शेर है...' NATO देशों की 'ना' से भड़के डोनाल्ड ट्रंप

US-Iran War: दरअसल, ट्रंप ने नाटो देशों से ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका का साथ देने की अपील की थी, लेकिन नाटो के सहयोगी देश इसके लिए तैयार नहीं दिखे। वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि, ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, U.S.A. के बिना, NATO एक कागजी शेर है! वे परमाणु शक्ति वाले ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते थे

अपडेटेड Mar 20, 2026 पर 9:33 PM
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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग को 20 दिन हो चुके हैं।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग को 20 दिन हो चुके हैं। वहीं इस जंग में अमेरिका का साथ ना देने पर डोनाल्ड ट्रंप नाटो देशों पर भड़के हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों के रवैये की आलोचना की है। उन्होंने अमेरिका के सहयोगियों को "कायर" कहा है, क्योंकि वे ईरान के खिलाफ सैन्य मदद की उनकी मांगों को पूरा करने में नाकाम रहे। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर यह भी लिखा कि अमेरिका के बिना NATO सिर्फ एक “कागजी शेर” बनकर रह जाता है।

ट्रंप ने NATO को बताया कागजी शेर 

दरअसल, ट्रंप ने नाटो देशों से ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका का साथ देने की अपील की थी, लेकिन नाटो के सहयोगी देश इसके लिए तैयार नहीं दिखे। वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि, ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, U.S.A. के बिना, NATO एक कागजी शेर है! वे परमाणु शक्ति वाले ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते थे। अब जब वह लड़ाई फौजी तौर पर जीत ली गई है—और उनके लिए खतरा भी बहुत कम है—तो वे तेल की उन ऊंची कीमतों की शिकायत करते हैं जो उन्हें चुकानी पड़ रही हैं; लेकिन वे 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को खुलवाने में मदद नहीं करना चाहते—जो कि एक आसान सी फौजी कार्रवाई है और तेल की ऊंची कीमतों का एकमात्र कारण भी।


अमेरिका के साथ नहीं ट्रंप 

ईरान से जंग शुरू होने के बाद से ही डोनाल्ड ट्रंप लगातार NATO की आलोचना करते रहे हैं। हाल के दिनों में ट्रंप ने इस गठबंधन पर अपने हमले और तेज कर दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान समेत छह बड़े देशों ने कहा है कि वे होर्मुज की सुरक्षा के लिए उचित प्रयासों में सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन किसी सैन्य मिशन में शामिल होने को लेकर उन्होंने अभी तक कोई पक्की प्रतिबद्धता नहीं दी है। जर्मनी और इटली जैसे कुछ देशों का कहना है कि वे तब तक कोई कदम नहीं उठाएंगे, जब तक मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष में युद्धविराम नहीं हो जाता।

वहीं ईरान की ओर से की गई नाकेबंदी के कारण होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है, जबकि यह रास्ता दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसी वजह से इस टकराव के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। यह पूरा विवाद 28 फरवरी से शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में पलटवार किया।

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