अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गुरुवार को दावोस में गाजा के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' को लॉन्च कर दिया है। ट्रम्प ने कहा कि इस बोर्ड का शुरुआती मकसद गाजा में हुए युद्धविराम को मजबूत करना है, लेकिन आगे चलकर यह दूसरे ग्लोबल विवादों में भी भूमिका निभा सकता है। इसके हस्ताक्षर समारोह में 20 से ज्यादा देशों के नेता मौजूद रहे। अमेरिका के सहयोगी माने जाने वाले ज्यादातर यूरोपीय देश इस समारोह से गायब रहे। जबकि सऊदी अरब, पाकिस्तान, कतर, UAE, अर्जेंटीना और पराग्वे के नेता वहां मौजूद थे। भारत भी इस समारोह में मौजूद नहीं था।
बता दें कि, गाजा पीस बोर्ड के संस्थापक चार्टर पर साइन करने से पहले ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में शांति के प्रयासों में 59 देश शामिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने गाजा को अब तक की सबसे ज्यादा मदद दी है और 20 से ज्यादा बंधकों को रिहा कराने में सफलता हासिल की है। ट्रंप ने कहा, “पिछले साल अक्टूबर में हमने गाजा में चल रहे संघर्ष को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए एक योजना पेश की थी। मुझे खुशी है कि पिछले साल के अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से हमारे इस विजन को अपनाया।” उन्होंने आगे बताया कि इस योजना के पहले चरण में गाजा में सीजफायर के दौरान रिकॉर्ड स्तर की मानवीय मदद पहुंचाई गई। साथ ही उन्होंने इस प्रयास में सहयोग करने वाले देशों का धन्यवाद भी किया।
डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि सभी 20 जीवित बंधकों की रिहाई अब तय हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कुल 20 ही बंधक जिंदा बचे थे और उन्हें बाहर निकालना सबसे मुश्किल काम था। ट्रंप ने कहा कि इससे पहले सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला गया था। उन्होंने यह भी बताया कि करीब 28 ऐसे लोग थे जिनकी मौत हो चुकी थी, लेकिन उनके परिवार उन्हें उसी तरह वापस चाहते थे, जैसे वे जिंदा हों। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि हमास को गाजा सीज़फायर समझौते के तहत अपने हथियार छोड़ने होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हमास ने ऐसा नहीं किया, तो यह संगठन का अंत होगा। ट्रंप ने कहा कि हमास के लोग भले ही हथियारों के साथ बड़े हुए हों, लेकिन अब उन्हें हथियार छोड़ने ही होंगे, वरना उनके लिए कोई रास्ता नहीं बचेगा।