'अगर हम नहीं मिलेंगे तो कुछ नहीं होगा', रूस और यूक्रेन के साथ त्रिपक्षीय बातचीत से पहले बोले ट्रंप

ट्रंप ने कहा, “जब भी हम मिलते हैं, कुछ न कुछ आगे बढ़ता है। अगर बैठक नहीं होगी, तो कुछ भी नहीं होगा। पहले तीन सालों में कोई बातचीत नहीं हुई। अब हम मिल रहे हैं और देखते हैं क्या होता है। मुझे उम्मीद है कि इससे कई लोगों की जान बचाई जा सकेगी

अपडेटेड Jan 23, 2026 पर 8:51 AM
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रूस और यूक्रेन के साथ त्रिपक्षीय बातचीत से पहले बोले ट्रंप

अमेरिका, रूस और यूक्रेन यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) में तीन-पक्षीय बातचीत करने जा रहे हैं। इसका मकसद करीब चार साल से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करना है। इस बातचीत को लेकर कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बातचीत बहुत जरूरी है। उनका मानना है कि सीधे बैठकर बात किए बिना कोई समाधान नहीं निकल सकता।

ट्रंप ने कहा, “जब भी हम मिलते हैं, कुछ न कुछ आगे बढ़ता है। अगर बैठक नहीं होगी, तो कुछ भी नहीं होगा। पहले तीन सालों में कोई बातचीत नहीं हुई। अब हम मिल रहे हैं और देखते हैं क्या होता है। मुझे उम्मीद है कि इससे कई लोगों की जान बचाई जा सकेगी।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि हर पक्ष समझौते के लिए कुछ न कुछ रियायत दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में यूरोप की भूमिका अहम होगी, क्योंकि यह युद्ध यूरोप को ज्यादा प्रभावित करता है।


उन्होंने साफ किया कि उनका मकसद राजनीति या पैसा नहीं, बल्कि इंसानी जान बचाना है। ट्रंप ने कहा, “मैं यह काम जान बचाने के लिए कर रहा हूं। यह अमेरिका से ज्यादा यूरोप के लिए जरूरी है।”

रूस को लेकर ट्रंप ने कहा कि उन्हें पहले लगा था कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पूरा यूक्रेन लेना चाहते हैं, लेकिन अगर समझौता हो जाता है तो ऐसा नहीं होगा।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि यह पहली बार होगा जब यूक्रेन, अमेरिका और रूस के प्रतिनिधि एक साथ बातचीत करेंगे। यह बैठक यूएई में दो दिन तक चलेगी।

जेलेंस्की ने कहा, “यह पहली त्रिपक्षीय बैठक होगी। बातचीत कल और परसों होगी। रूस को भी समझौते के लिए तैयार रहना होगा।”

यूक्रेन की तरफ से इस बातचीत का नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव करेंगे। टीम में सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

जेलेंस्की ने कहा, “यह वार्ताकारों के स्तर की बैठक होगी। नतीजा क्या होगा, यह आगे पता चलेगा।”

UAE पहले भी रूस और यूक्रेन के बीच कैदियों की अदला-बदली जैसी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है।

दावोस समिट के दौरान ट्रंप और ज़ेलेंस्की की भी मुलाकात हुई। ट्रंप ने इसे सकारात्मक बातचीत बताया, लेकिन कहा कि चुनौतियां अभी बाकी हैं।

ट्रंप ने कहा, “युद्ध खत्म होना चाहिए। हर महीने करीब 25 से 30 हजार सैनिक मारे जा रहे हैं। यही सबसे बड़ी चिंता है।”

वहीं जेलेंस्की ने भी ट्रंप से हुई मुलाकात को अच्छा बताया, लेकिन कहा कि अंतिम दौर की बातचीत सबसे मुश्किल होती है। उन्होंने कहा, “अपने देश के हितों की रक्षा करते हुए बातचीत करना आसान नहीं है, लेकिन जरूरी है।”

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