Greenland: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। ट्रंप ने आज फिर से इस बात को स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई नहीं की, तो रूस या चीन इस द्वीप पर कब्जा कर लेंगे, जिसे वे होने नहीं देंगे'।
व्हाइट हाउस में तेल और गैस अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने अपने इरादे साफ किए। ट्रंप ने कहा, 'मैं एक डील करना चाहता हूं, 'आसान तरीके' से लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम इसे 'मुश्किल तरीके' से करेंगे।' इसके साथ ही ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता को खारिज करते हुए कहा कि 500 साल पहले नाव लेकर वहां पहुंचने का मतलब यह नहीं कि वह जमीन आज भी उनकी है।
उन्होंने ग्रीनलैंड की सुरक्षा का मजाक उड़ाते हुए कहा, 'उनकी सुरक्षा क्या है? दो डॉग स्लेड्स। जबकि वहां रूसी और चीनी डिस्ट्रॉयर्स और पनडुब्बियां घूम रही हैं।'
ग्रीनलैंड क्यों है अमेरिका के लिए जरूरी?
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को 'राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता' बताया है। ट्रंप का मानना है कि रूस और चीन आर्कटिक क्षेत्रों में अपना पैर पसार रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे।' ग्रीनलैंड दुर्लभ खनिजों, यूरेनियम और लोहे का विशाल भंडार है, जो आधुनिक तकनीक और सैन्य उपकरणों के लिए महत्वपूर्ण है। यह आर्कटिक के नए शिपिंग रूट्स और उत्तरी अटलांटिक की सुरक्षा के लिए 'गेटवे' की तरह है।
वेनेजुएला पर एक्शन के बाद यूरोपीय देशों की बढ़ी चिंता
ट्रंप की इस टिप्पणी ने विशेष रूप से यूरोपीय देशों को चिंतित कर दिया है। हाल ही में अमेरिकी सेना ने 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' के तहत वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को उनके घर से पकड़ लिया था। डेनमार्क और नाटो सहयोगियों को डर है कि ट्रंप अब ग्रीनलैंड के खिलाफ भी इसी तरह की सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ग्रीनलैंड पर कब्जे के साथ ही टूट जाएगा NATO गठबंधन: डेनमार्क
प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी हमला नाटो गठबंधन का अंत होगा। उन्होंने इसे 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' बताया।ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन ने ट्रंप से अपनी 'कब्जे की कल्पनाओं' को छोड़ने को कहा है और स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला वहां की जनता ही करेगी।
आपको बता दें कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले सप्ताह डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रतिनिधियों से मिलने वाले हैं। इन वार्ताओं से तय होगा कि ट्रंप का 'आसान रास्ता' काम करता है या दुनिया एक और बड़े सैन्य तनाव की ओर बढ़ती है।