Iran Nuclear Talks: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई एक सीक्रेट मीटिंग `ने पश्चिम एशिया में हलचल मचा दी है। 'सीबीएस न्यूज' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर ईरान के साथ चल रही परमाणु बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती है, तो अमेरिका ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर इजरायली सैन्य हमले का समर्थन करेगा।
ट्रंप का 'प्लान बी', कूटनीति विफल तो होगा सैन्य प्रहार
दिसंबर में हुई एक बैठक का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप ने नेतन्याहू को भरोसा दिलाया है कि वाशिंगटन इजरायल की सैन्य कार्रवाई के साथ खड़ा रहेगा। अब अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी इस बात की योजना बना रहे हैं कि इस संभावित हमले में अमेरिका किस तरह मदद कर सकता है। इसमें इजरायली लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन उपलब्ध कराना और हमले के लिए सुरक्षित हवाई मार्ग सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल है।
अरब देशों का क्या है रुख?
हालांकि, इस प्लानिंग में एक बड़ी कूटनीतिक बाधा भी है। जॉर्डन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे क्षेत्रीय देशों ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वे ईरान पर हमले के लिए अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग नहीं करने देंगे। इन देशों को डर है कि सीधा टकराव पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है, जिससे उनकी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को भी खतरा होगा।
जिनेवा और मस्कट में बातचीत का दौर
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ओमान और जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष बातचीत का दूसरा दौर शुरू हो रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी से मिलने वाले हैं। वर्तमान में सबसे बड़ी चिंता ईरान के पास मौजूद 400 किलो से अधिक समृद्ध यूरेनियम (60% शुद्धता) को लेकर है, जिसका उपयोग परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है।
दोनों पक्षों के है अपने अलग-अलग दावे
नेतन्याहू का कहना हैं कि, किसी भी समझौते में ईरान को अपना पूरा यूरेनियम भंडार खत्म करना होगा और परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना होगा। दूसरी ओर, ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने नरमी के संकेत देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ईमानदारी दिखाता है और प्रतिबंध हटाता है, तो ईरान यूरेनियम भंडार को सीमित करने पर विचार कर सकता है। डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल कूटनीति को मौका दे रहे हैं, लेकिन उनकी चेतावनी स्पष्ट है कि बातचीत की विफलता का अंजाम बहुत बुरा होगा।