Trump In Davos: डावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मंच पर आज एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 6 साल बाद डावोस आए और उनके एजेंडे में सबसे ऊपर भारतीय उद्योगपतियों के साथ एक विशेष रिसेप्शन और बैठक है। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ और H-1B वीजा के कड़े नियमों ने भारतीय बाजार में खलबली मचा रखी है।
स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले ट्रंप ने अपने मजाकिया लहजे में कहा, 'मैं स्विट्जरलैंड की एक खूबसूरत जगह जा रहा हूं, जहां मुझे यकीन है कि लोग मेरा बहुत खुशी से इंतजार कर रहे होंगे।' हालांकि, हकीकत यह है कि यूरोपीय नेता और भारतीय निर्यातक उनकी 'सख्त व्यापार नीतियों' को लेकर काफी चिंतित हैं।
ट्रंप के साथ रिसेप्शन में शामिल होने वाले भारतीय 'बिजनेस टाइकून'
ट्रंप के रिसेप्शन में भारत के सात सबसे प्रभावशाली बिजनेस लीडर्स को आमंत्रित किया गया है:
इनके अलावा मुकेश अंबानी, नंदन नीलेकणी, और निखिल कामथ जैसे 100 से अधिक भारतीय दिग्गज भी डावोस में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
टैरिफ, वीजा और एच-1बी वीजा: बैठक के 3 सबसे बड़े मुद्दे
भारतीय सीईओ के लिए यह केवल शिष्टाचार भेंट नहीं है, बल्कि व्यापारिक अस्तित्व की लड़ाई है। पिछले चार महीनों से भारतीय निर्यातक अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% शुल्क की मार झेल रहे हैं। भारतीय कंपनियां इस पर राहत की उम्मीद कर रही हैं।इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा के लिए 1 लाख डॉलर (लगभग ₹85 लाख) का अतिरिक्त शुल्क और लॉटरी सिस्टम की जगह 'वेतन-आधारित' चयन प्रक्रिया लागू कर दी है। इससे टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी आईटी कंपनियों की लागत कई गुना बढ़ गई है।
फिलहाल ट्रंप के ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र बनाने के दावों और सोशल मीडिया पर शेयर किए गए विवादित नक्शों ने यूरोपीय देशों के साथ तनाव बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता है।
गाजा के पुनर्विकास के लिया बनाया 'बोर्ड ऑफ पीस'
ट्रंप इस सप्ताह के अंत में 'बोर्ड ऑफ पीस चार्टर' की घोषणा भी कर सकते हैं। यह योजना गाजा के पुनर्विकास से जुड़ी है, जिसमें वे दुनिया भर के बड़े देशों और कॉर्पोरेट्स को निवेश करने के लिए आमंत्रित करेंगे। ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' में पुतिन, पीएम मोदी सहित दुनियाभर के कई नेताओं को शामिल होने के आमंत्रित किया है।