'अब हमें अमेरिकी सुरक्षा की जरूरत नहीं...', ईरान के हमलों के बाद UAE में उठे बागी सुर; सैन्य बेस हटाने की हो रही मांग

UAE US Military Bases Debate: अब्दुल्ला का कहना है कि हालिया संघर्ष के दौरान UAE ने साबित कर दिया है कि वह अपनी रक्षा खुद करने में सक्षम है। उन्होंने कहा, 'UAE को अब अपनी रक्षा के लिए अमेरिका की जरूरत नहीं है क्योंकि अमेरिकी बेस अब सुरक्षा के बजाय एक 'बोझ' बनते जा रहे हैं

अपडेटेड Apr 20, 2026 पर 12:06 PM
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यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब ईरान-अमेरिका के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है

UAE-America Debate: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच संयुक्त अरब अमीरात में एक नई और बड़ी बहस छिड़ गई है। UAE के जाने-माने विश्लेषक अब्दुल खालिक अब्दुल्ला ने मांग की है कि अब समय आ गया है जब UAE को अपने देश में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करने पर विचार करना चाहिए। उनका तर्क है कि ये बेस अब सुरक्षा के बजाय एक 'बोझ' बनते जा रहे हैं।

यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब ईरान-अमेरिका के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है। हालांकि, सीजफायर के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ है और समुद्र में जहाजों की जब्ती और ड्रोन हमलों की खबरें लगातार आ रही हैं।

'रणनीतिक संपत्ति नहीं, अब बोझ हैं ये बेस'


अब्दुल्ला का कहना है कि हालिया संघर्ष के दौरान UAE ने साबित कर दिया है कि वह अपनी रक्षा खुद करने में सक्षम है। उन्होंने कहा, 'UAE को अब अपनी रक्षा के लिए अमेरिका की जरूरत नहीं है।' उनका मानना है कि विदेशी ठिकानों की मेजबानी करने के बजाय UAE को आधुनिक सैन्य प्रणालियों की खरीद पर ध्यान देना चाहिए।

अल-मिन्हाद बेस पर हमले का दावा और विवाद

यह बहस तब शुरू हुई जब ईरान ने दावा किया कि उसने पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान UAE में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दुबई के पास स्थित अल-मिन्हाद कमांड साइट पर हमला किया गया, जिसमें अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की बात भी कही गई। अमेरिका ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। वहीं, UAE का कहना है कि उसने बड़ी संख्या में ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और 'मॉस्किटो फ्लीट' का खतरा

हालिया संघर्ष के दौरान ईरान ने केवल UAE ही नहीं, बल्कि बहरीन, इराक और कुवैत में भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। ऐतिहासिक रूप से अल-धफरा और अल-मिन्हाद जैसे बेस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और हवाई रक्षा के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं। जानकारों का मानना है कि UAE ने पिछले एक दशक में मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसे- THAAD और Patriot पर भारी निवेश किया है, जिससे उसकी अपनी सुरक्षा क्षमता बढ़ी है।

क्या अमेरिका से टूटेंगे सैन्य रिश्ते?

अब्दुल खालिक अब्दुल्ला का सुझाव यह नहीं है कि अमेरिका से रिश्ते खत्म कर दिए जाएं, बल्कि वे रिश्तों के स्वरूप को बदलना चाहते हैं। उनका कहना है कि UAE को अमेरिका से 'आधुनिक और उन्नत सैन्य उपकरण' खरीदना जारी रखना चाहिए, लेकिन स्थाई सैन्य ठिकानों की भूमिका पर पुनर्विचार करना चाहिए। वे चाहते हैं कि UAE विदेशी सेनाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपनी खुद की रक्षा प्रणालियों को मजबूत करने को प्राथमिकता दे।

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