Umar Khalid: आठ अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसदों ने वाशिंगटन में भारत के राजदूत को एक पत्र लिखकर दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद JNU के पूर्व छात्र और एक्टिविस्ट उमर खालिद के लिए जमानत और निष्पक्ष, समय पर सुनवाई की मांग की है। खालिद गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत करीब पांच साल से अधिक समय से बिना सुनवाई के जेल में हैं। सांसदों ने लंबे समय तक बिना सुनवाई के हिरासत और अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों पर चिंता जताई है। उमर खालिद के माता-पिता दिसंबर में कुछ अमेरिकी नेताओं से मिले थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, उमर खालिद के पिता SIMI के पूर्व सदस्य हैं। अमेरिकी प्रतिनिधियों जिम मैकगवर्न और जेमी रस्किन के नेतृत्व वाले इस लेटर में भारतीय अधिकारियों से खालिद को जमानत देने और यह सुनिश्चित करने की अपील की है। उनका कहना है कि उनकी सुनवाई बिना किसी और देरी के शुरू हो। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र खालिद को 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साज़िश के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह जेल में बंद हैं।
मैकगवर्न और रस्किन के अलावा लेटर पर सिग्नेचर करने वालों में डेमोक्रेटिक सांसद क्रिस वैन होलेन, पीटर वेल्च, प्रमिला जयपाल, जैन शाकोव्स्की, रशीदा तलैब और लॉयड डॉगेट शामिल हैं। भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों के प्रति अपने सम्मान पर जोर देते हुए सांसदों ने सवाल उठाया कि बिना सुनवाई शुरू हुए खालिद की लगातार हिरासत इंटरनेशनल कानूनी मानदंडों के साथ कैसे मेल खाती है।
उन्होंने इस बात का भी स्पष्टीकरण मांगा कि उनकी गिरफ्तारी के पांच साल से ज्यादा समय बाद भी न्यायिक कार्यवाही क्यों शुरू नहीं हुई है। लेटर में सांसदों ने नई दिल्ली पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि खालिद को उचित प्रक्रिया मिले। साथ ही उनके मामले की निष्पक्ष और समय पर सुनवाई हो।
उन्होंने भारत के आतंकवाद विरोधी कानून के तहत बिना सुनवाई के हिरासत के लंबे समय तक इस्तेमाल और नागरिक स्वतंत्रता पर इसके प्रभावों पर चिंता जताई। मैकगवर्न ने बाद में एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस अपील को और आगे बढ़ाया। इसमें कहा गया कि वह इस महीने की शुरुआत में वाशिंगटन में खालिद के माता-पिता से मिले थे।
उमर को लगातार मिल रही है जमानत
अमेरिकी सांसदों का यह हस्तक्षेप ऐसे समय में आया है जब भारतीय अदालतों ने सीमित मौकों पर खालिद को अंतरिम ज़मानत दी है। 11 दिसंबर को, दिल्ली की एक अदालत ने खालिद को अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए 16 से 29 दिसंबर तक अंतरिम जमानत दी थी। PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में अंतरिम राहत दी।
अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान अदालत ने कई शर्तें लगाईं, जिसमें सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक भी शामिल है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि खालिद इस मामले में किसी भी गवाह से संपर्क न करे और अपना मोबाइल फोन नंबर इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर के साथ शेयर करे।
उन्हें 29 दिसंबर की शाम को जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का भी निर्देश दिया गया था। पिछले साल, उन्हें दूसरी शादी में शामिल होने के लिए सात दिनों की अंतरिम जमानत दी गई थी। 2022 में भी उन्हें इसी तरह की कोर्ट से राहत मिली थी।