अमेरिका और चीन में ट्रेड डील पर लंदन में चल रही बातचीत खत्म हो गई है। दोनों देश टैरिफ वॉर खत्म करने को राजी हो गए हैं। इससे दोनों देशों के बीच संवेदनशील आइटम्स का आयात-निर्यात फिर से शुरू हो जाएगा। बातचीत में शामिल दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने बताया कि दोनों पक्ष एक ऐसे फ्रेमवर्क पर सहमत हो गए हैं, जिसमें यह बताया गया है कि उन मसलों को कैसे लागू किया जाएगा, जिन पर सहमति बन चुकी है। अब दोनों देशों के प्रतिनिधि अपनी-अपनी सरकार के प्रमुखों को प्रस्ताव के बारे में बताएंगे। चीन के मुख्य व्यापार वार्ताकार ली चेनगैंग ने यह जानकारी दी।
रेयर अर्थ मैगनेट्स की सप्लाई शुरू होगी
अभी अमेरिका और चीन के बीच हुई डील के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है। अमेरिका के व्यापार वार्ताकारों ने कहा कि उन्हें इस बात की पूरी उम्मीद है कि रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) और मैगनेट्स के शिपमेंट से जुड़े मसलों का समाधान हो जाएगा। अमेरिकी व्यापार मंत्री होवार्ड लुटनिक ने लंदन में संवाददाताओं से कहा, "एक बार प्रेसिडेंट (डोनाल्ड ट्रंप) की मंजूरी मिलने के बाद हम इसे लागू करने की कोशिश करेंगे।" लंदन में दोनों देशों के बीच दो दिन की बातचीत हुई। यह बातचीत करीब 20 घंटों तक हुई।
जरूरत पड़ने पर दोनों देश आगे भी बातचीत को तैयार
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमाइसन ग्रीर ने कहा कि आगे दोनों देशों के बीच कोई मीटिंग नहीं होने जा रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के प्रतिनिधि आपस में बातचीत करते रहते हैं और जरूरत पड़ने पर वे बातचीत करेंगे। लंदन में यह बैठक 9 जून को शुरू हुई थी। इस पर पूरी दुनिया की नजरें लगी थीं। अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर का असर न सिर्फ दोनों देशों पर पड़ा है बल्कि भारत सहित दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भी इसने प्रभावित किया है।
रेयर अर्थ मैगनेट्स का 90 फीसदी उत्पादन चीन में
इस बातचीत से सबसे ज्यादा उम्मीद रेयर अर्थ मैगनेट्स की सप्लाई फिर से शुरू होने की थी। रेयर अर्थ मैगनेट्स इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और स्मार्टफोन सहित कई इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स के उत्पादन के लिए जरूरी है। रेयर अर्थ मैगनेट्स का 90 फीसदी उत्पादन चीन में होता है। टैरिफ वॉर शुरू होने के बाद अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए चीन ने रेयर अर्थ की सप्लाई काफी घटा दी है। इसका असर अमेरिका, भारत सहित दूसरे देशों में Electric Vehicles के उत्पादन पर पड़ा है।
ट्रेड वॉर जल्द खत्म होने की उम्मीद बढ़ी
लुनटिक ने कहा, "हमें इस बात की पूरी उम्मीद है कि जहां तक अमेरिका का संबंध है तो रेयर अर्थ मिनरल्स और मैगनेट्स की सप्लाई का मसला बातचीत के बाद जो फ्रेमवर्क बना है उसके लागू होन पर हल हो जाएगा।" हालांकि, चीन के विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय ने इस बारे में तुरंत कुछ कहने से इनकार कर दिए। लंदन में बातचीत से पहले दोनों देशों के बीच जेनेवा में बातचीत हुई थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जेनेवा और लंदन की बातचीत के बाद ऐसा लगता है कि दोनों के बीच ट्रेड वॉर जल्द खत्म हो जाएगा।
मई में अमेरिका को चीन से होने वाला निर्यात 34 फीसदी घटा
अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के ऐलान और उसके बाद चीन के जवाबी कदम से दोनों देशों के बीच व्यापार में काफी कमी आई है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, मई में चीन से अमेरिका को होने वाले निर्यात में 34 फीसदी कमी आई। यह फरवरी 2020 के बाद निर्यात में सबसे बड़ी गिरावट है। तब कोविड के मामले बढ़ने पर चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को दुनिया से काट लिया था, जिसका असर एक्सपोर्ट पर पड़ा था।
यह भी पढ़ें: दुनिया का फेमस टिकटॉकर US छोड़ने पर क्यों हुआ मजबूर? सामने आई बड़ी वजह
चिप और रेयर अर्थ मैगनेट्स की सप्लाई सबसे बड़ा मसला
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच सबसे बड़ा मसला चिप और रेयर अर्थ मैगनेट्स की सप्लाई का है। अमेरिका चिप का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है तो चीन रेयर अर्थ मैगनेट्स का सबसे बड़ा सप्लायर है। ये दोनों ही चीजें इलेक्ट्रॉनिक्स सहित की तरह के प्रोडक्ट्स के उत्पादन के लिए बेहद जरूरी हैं। खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स बनाने के लिए रेयर अर्थ मैगनेट्स बहुत जरूरी है।