पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो भारत की शिकायत करने पहुंच अमेरिका पहुंचे थे। लेकिन, वहां जो हुआ उसकी दूर-दूर तक कल्पना उन्होंने नहीं की थी। अमेरिकी सांसद ब्रैड शेरमैन की बातों पर तो उन्हें कुछ पल के लिए यकीन नहीं हुआ होगा। वह अमेरिका में जो सुनना चाहते थे, ठीक उसके उलट उन्हें गुरुवार को सुनने को मिला। शेरमैन ने उन्हें आतंकवाद पर लगाम लगाने खासकर जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के खिलाफ सख्त कदम उठाने को कहा। इतना ही नहीं, सासंद ने जेईम को एक घृणित समूह बताया, जो जघन्य घटनाओं को अंजाम देता है।
अमेरिकी सांसद ने X पर किया पोस्ट
Bilawal Bhutto के नेतृत्व पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका गया हुआ है। गुरुवार को इस प्रतिनिधिमंडल ने वाशिंगटन में शेरमैन से मुलाकात की। शरमैन ने बाद में इस मुलाकात के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, "मैंने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को आंतकवाद खत्म करने की जरूरत के बारे में बताया। खासकर JeM के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा, जिसने 2002 में दोस्त डेनियल पर्ल की हत्या की थी।"
डेनियल पर्ल की हत्या की दिलाई याद
अमेरिकी सांसद ने अपने पोस्ट में लिखा कि पर्ल का परिवार मेरे डिस्ट्रिक्ट में रहता है। उन्होंने लिखा, "पाकिस्तान को इस घिनौने समूह को खत्म करने के लिए वह सब कुछ करना चाहिए, जो वह कर सकता है। पाकिस्तान को अपने इलाके में आतंकवाद पर रोक लगानी चाहिए।" यह ध्यान में रखने वाली बात है कि ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद पाकिस्तान के भारत में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने के बाद भारत ने दुनियाभर में पाकिस्तान की करतूतों को उजागर करने के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल भेजे। पाकिस्तान ने भी भारत की देखादेखी अपने प्रतिनिधिमंडल कई देशों में भेने का फैसला किया।
भारत की नकल करने का दांव उल्टा पड़ा
पाकिस्तान का भारत की देखादेखी दूसरे देशों में प्रतिनिधिमंडल भेजने का दांव उल्टा पड़ गया। दरअसल, पाकिस्तान भारत की नकल करने की कोशिश में यह भूल गया कि उसके दामन पर ऐसे कई दाग लगे हैं, जिन्हें वह चाहकर भी नहीं मिटा सकता। अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या का दाग इनमें से एक है। एक प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी के पत्रकार डेनियल पर्ल की अमेरिका में निर्मम तरह से हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या की तस्वीरों ने रोंगटे खड़े कर दिए थे। लेकिन, तब अमेरिका अपने स्वार्थ को ध्यान में रख चुप रहना बेहतर समझा। लेकिन, अब जब स्थितियां बदल चुकी हैं तो डेनियल पर्ल की हत्या से मिला अमेरीकियों का घाव फिर से हरा हो गया है।
JeM आतंकी हमलों के लिए दुनियाभर में कुख्यात
JeM का नाम संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादी समूहों की सूची में शामिल है। यह आतंकी समूह इंडिया में अननिगत हमलों में निर्दोष लोगों को अपना शिकार बना चुका है। 14 फरवरी, 2019 को श्रीनगर के नजदीक पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाने में इसी आतंकी समूह का हाथ था। इस हमले में 40 से ज्यादा सीआरपीएफ के जवानों की मौत हो गई थी। इस घटना ने हर भारतीय को आक्रोश से भर दिया था।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बदतर स्थिति पर सवाल
बिलावल के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में शेरमैन ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बदतर स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ईसाई, हिंदू और अहमदिया मुस्लिमों को पाकिस्तान में अपनी मजहब के हिसाब से जीने की आजादी मिलनी चाहिए। उन्हें बगैर हिंसा, डर और भेदभाव के लोकतांत्रिक प्रकिया में हिस्सा लेने की इजाजत दी जानी चाहिए। शरमैन ने प्रतिनिधिमंडल को यह भी कहा कि वह अपनी सरकार को डॉ शकील अफरीदी को रिहा करने के लिए कहे। अफरीदी वह पाकिस्तान डॉक्टर हैं, जिन्होंने पाकिस्तान में रह रहे आतंक के आका ओसामा बिन लादेन का सुराग सीआईए को दी थी। पाकिस्तान में उन्हें 2011 में गिरफ्तार कर लिया गया था।
लादेन के पकड़वाने वाले डॉक्ट को कैद से रिहा करने की मांग
अफरीदी की खता सिर्फ यह है कि उन्होंने पाकिस्तान में छुपकर रह रहे ओसामा बिन लादेन को पकड़वाने में अमेरिका की मदद की थी। वह पिछले 14 साल से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। ओसामा बिन लादेन को पनाह देने से पाकिस्तान की असली मंशा पूरी दुनिया जान गई थी। दरअसल, पाकिस्तान की दिलचस्पी कभी आतंकवाद से दूरी बनाने में नहीं रही है। पाकिस्तान की सरकार के आतंकियों से करीबी रिश्ते रहे हैं। उन्हें पैसे सहित हर तरह की मदद पाकिस्तान की सरकार से मिलती रही है। इस शह का इस्तेमाल वे भारत में निर्दोष लोगों की हत्या करने के लिए करते हैं।