Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी पकड़ मजबूत करने और ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह ठप करने के लिए लगभग 4,500 से 5,000 नौसैनिकों और नाविकों की ताजा तैनाती कर दी है। इस सैन्य तैनाती का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मकसद ईरान के खर्ग द्वीप पर नियंत्रण करना बताया जा रहा है।
खर्ग द्वीप को ईरान का 'आर्थिक लाइफलाइन' माना जाता है। ईरान का 90% तेल निर्यात इसी द्वीप के जरिए होता है। इस कदम के साथ अमेरिका का निशाना ईरान को आर्थिक तौर पर कमजोर करने का है। अगर अमेरिका इस द्वीप पर नियंत्रण कर लेता है, तो ईरान की कमाई का जरिया पूरी तरह कट जाएगा और वह बातचीत के लिए मजबूर हो जाएगा।
एक इजरायली अधिकारी ने कहा, 'ये मरीन सैनिक वहां सजावट के लिए नहीं आ रहे हैं, बल्कि इस द्वीप और खाड़ी के रास्ते पर कब्जा करने के लिए आ रहे हैं।'
F-35 और बख्तरबंद जहाज तैनात
पेंटागन ने अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के लिए '11वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट' को भी सक्रिय कर दिया है। इस दस्ते में इंफेंट्री बटालियन, घातक F-35 फाइटर जेट्स, अटैक हेलीकॉप्टर और पानी व जमीन दोनों पर चलने वाले बख्तरबंद वाहन शामिल हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र में यातायात बहाल करने के लिए अमेरिका को सिरी, ग्रेटर टुनब और अबू मूसा जैसे उन द्वीपों पर भी कब्जा करना पड़ सकता है, जहां ईरान ने एंटी-शिप मिसाइलें तैनात कर रखी हैं।
तेल की कीमतों में 'आग', $105 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
होर्मुज के रास्ते की नाकेबंदी ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है और यह $105 प्रति बैरल के पार निकल गया है। दुनिया का 20% तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है, जिसके बंद होने से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का खतरा है।
पीछे हटने को तैयार नहीं ईरान
अमेरिका की धमकियों के बीच ईरान ने खाड़ी देशों और अमेरिका को बेहद डरावनी चेतावनी दी है। ईरानी सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफकारी ने कहा कि अगर ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ, तो वे पूरे क्षेत्र के डिसेलिनेशन प्लांट्स यानी खारे पानी को पीने लायक बनाने वाले प्लांट को तबाह कर देंगे। बहरीन और कतर की 100% पेयजल आपूर्ति इन्हीं प्लांट पर टिकी है। यूएई की 80% और सऊदी अरब की 50% पानी की जरूरत भी इन्हीं से पूरी होती है। यानी हमला हुआ तो खाड़ी देश बूंद-बूंद पानी को तरस सकते हैं।