अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता टूटने की कगार पर, वाशिंगटन ने ठुकराई तेहरान की शर्तें; सैन्य कार्रवाई का बढ़ रहा है खतरा

US–Iran Nuclear Talks: राजनयिक गतिरोध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़े लहजे में चेतावनी दी है। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता को मौजूदा स्थिति से डरना चाहिए, तो ट्रंप ने कहा, 'उन्हें बहुत चिंतित होना चाहिए'

अपडेटेड Feb 05, 2026 पर 7:38 AM
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अमेरिका का मानना है कि ईरान बातचीत के दायरे को सीमित करके अपनी मिसाइल शक्तियों और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर चर्चा से बचना चाहता है

US–Iran Nuclear Talks: अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को होने वाली महत्वपूर्ण परमाणु वार्ता पहले ही संकट में घिर गई है। विवाद तब शुरू हुआ जब ईरान ने अचानक वार्ता के स्वरूप में बदलाव की डिमांड कर दी, जिसे वाशिंगटन ने बुधवार को सिरे से खारिज कर दिया। पहले दोनों पक्ष इस्तांबुल में कई पश्चिम एशियाई देशों की मौजूदगी में बातचीत के लिए सहमत थे, लेकिन ईरान अब ओमान में केवल द्विपक्षीय यानी सिर्फ दो देशों के बीच चर्चा चाहता है। ईरान का तर्क है कि वह केवल परमाणु मुद्दों पर बात करना चाहता है, जबकि अमेरिका ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को भी एजेंडे में शामिल करने पर अड़ा है।

अमेरिका का सख्त रुख

बातचीत में आए इस गतिरोध पर एक अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हमने उनसे कहा कि या तो पुरानी शर्तों पर बात होगी या कुछ नहीं, और उन्होंने 'कुछ नहीं' को चुना।' अमेरिका का मानना है कि ईरान बातचीत के दायरे को सीमित करके अपनी मिसाइल शक्तियों और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर चर्चा से बचना चाहता है। वाशिंगटन ने साफ कर दिया है कि वे पुरानी कूटनीतिक लचीलापन दिखाने के मूड में नहीं हैं और अगर कोई समझौता होता है, तो वह ठोस और वास्तविक होना चाहिए, न कि केवल समय की बर्बादी।


राष्ट्रपति ट्रंप की खामेनेई को चेतावनी

राजनयिक गतिरोध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़े लहजे में चेतावनी दी है। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता को मौजूदा स्थिति से डरना चाहिए, तो ट्रंप ने कहा, 'उन्हें बहुत चिंतित होना चाहिए।' अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि अगर कूटनीति विफल रहती है, तो 'अन्य विकल्पों' पर विचार किया जाएगा, जिसे सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि वे ईरान के साथ किसी भी दिखावे वाली बातचीत का हिस्सा नहीं बनेंगे।

सैन्य कार्रवाई का बढ़ता खतरा

वर्तमान गतिरोध से यह डर बढ़ गया है कि कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद हो सकता है। पर्दे के पीछे की योजना यह थी कि परमाणु मुद्दे और क्षेत्रीय सुरक्षा पर दो अलग-अलग स्तरों पर समानांतर बातचीत की जाए, लेकिन ईरान के हालिया व्यवहार ने अमेरिका को सशंकित कर दिया है। अगर इस सप्ताह बातचीत शुरू नहीं होती है, तो कूटनीतिक ट्रैक पूरी तरह ठप हो सकता है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा और अमेरिका सैन्य विकल्पों की ओर कदम बढ़ा सकता है। फिलहाल, गेंद ईरान के पाले में है कि वह मूल ढांचे पर वापस आता है या नहीं।

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