ईरान और अमेरिका की इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर हर किसी की नजर है। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस आए हैं, जबकि ईरान की ओर से नेतृत्व स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ कर रहे हैं। इस दल में विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं। इन वार्ताओं का उद्देश्य मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को खत्म करना है। 40 दिन चले युद्ध में हजारों लोगों की जान जा चुकी है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है। वहीं इनसबके बीच एक सबका ध्यान खींचा है और वो बात कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के ‘यूनिफॉर्म डिप्लोमेसी’ की है।
ईरान-अमेरिका का साथ अलग-अलग गेम
पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली बातचीत के बीच मेहमानों का स्वागत प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने नहीं किया, बल्कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर खुद सामने आए। इस बातचीत के मौके को आसिम मुनीर ने अपनी ताकत दिखाने के एक खास मंच में बदल दिया। जिस बात ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, वह था आसिम मुनीर का बदला हुआ पहनावा। जब 71 सदस्यों वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा, तब मुनीर ‘कॉम्बैट ड्रेस’ यानी सैन्य वर्दी में नजर आए। ईरान के इस दल की अगुवाई संसद के स्पीकर मोहम्मद ग़ालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराकची कर रहे थे। लेकिन कुछ ही घंटों बाद, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस नूर खान एयरबेस पहुंचे, तो वही आसिम मुनीर पूरी तरह अलग अंदाज में दिखे। इस बार उन्होंने सूट-बूट पहन रखा था, जो उनके पहले वाले लुक से बिल्कुल अलग था।
आसिम मुनीर की ‘यूनिफॉर्म डिप्लोमेसी’
आसिम मुनीर के इस अलग-अलग पहनावे ने जियो पॉलिटिक्स पर नजर रखने वाले लोगों को चौंका दिया। कई जानकारों का मानना है कि यह ईरान और अमेरिका, दोनों के लिए एक सोचा-समझा संकेत था। मेजर जनरल संजय मेस्टन (रिटायर्ड) ने ‘इंडिया टुडे’ से बातचीत में कहा, “आम तौर पर किसी भी विदेशी नेता का स्वागत करते समय सेना के अधिकारी का वर्दी में होना जरूरी माना जाता है। आसिम मुनीर शायद यह दिखाना चाहते हैं कि अमेरिका के साथ वह एक कूटनीतिज्ञ की भूमिका में हैं, जबकि ईरान के सामने खुद को एक सैनिक के रूप में पेश कर रहे हैं। यही उनका संदेश हो सकता है।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के तौर पर इस तरह का व्यवहार पूरी तरह उपयुक्त नहीं माना जाता।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का स्वागत करते समय आसिम मुनीर का काला सूट पहनना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वह खुद को एक ‘राजनेता’ के रूप में पेश करना चाहते हैं। इससे पहले भी, जब उनकी मुलाकात डोनाल्ड ट्रंप से हुई थी—जिन्होंने मुनीर को अपना “पसंदीदा फील्ड मार्शल” बताया था—तब भी उन्होंने सूट ही पहना था। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान मुनीर का ‘कॉम्बैट यूनिफॉर्म’ पहनना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के समय में ईरान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा है, जिसमें मिसाइल हमले और सीमा पर झड़प जैसी घटनाएं शामिल हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मुताबिक, “आसिम मुनीर ने सेना की औपचारिक वर्दी नहीं, बल्कि कॉम्बैट ड्रेस पहनी थी। इसका मकसद ईरान के सामने अपनी ताकत दिखाना था—यानी वह खुद को एक सैन्य नेता के रूप में पेश कर रहे थे।” उन्होंने आगे कहा, “कुछ साल पहले ईरान और पाकिस्तान के बीच मिसाइल हमले भी हुए थे और सीमा पर तनाव भी देखा गया था। ऐसे में यह पूरा कदम कहीं न कहीं दिखावे और संदेश देने के लिए किया गया लगता है।” हालांकि ईरान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से अच्छे और गहरे रिश्ते रहे हैं, जिसमें उनकी भौगोलिक नजदीकी भी एक बड़ी वजह रही है। लेकिन हाल के समय में इन रिश्तों में तनाव देखने को मिला है।
साल 2024 में ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। इन हमलों का निशाना ‘जैश अल-अदल’ नाम का एक हथियारबंद संगठन था, जिस पर तेहरान पहले भी कई हमलों का आरोप लगा चुका है। यह संगठन ईरान के सिस्तान इलाके की आज़ादी की मांग करता रहा है। इसके कुछ ही दिनों बाद पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र में सैन्य हमले किए, जिनका निशाना बलूच उग्रवादी थे। दोनों देशों के बीच बढ़ते इस तनाव को शांत करने में चीन की अहम भूमिका रही। हालांकि, इसके बाद भी ईरान और पाकिस्तान के रिश्तों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।