US-Iran Talks: जनरल मुनीर ने फटकारा, पोस्ट डिलीट कराया! पाकिस्तान में ये है रक्षा मंत्री की इज्जत

US Iran Talks: सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान के मंत्री "बहुत लापरवाही" से काम कर रहे हैं। वाशिंगटन अब इस्लामाबाद को अपने ही नेतृत्व को काबू में रखने में असमर्थ मान रहा है। इससे पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका कमजोर पड़ सकती है और अमेरिका-ईरान के बीच बने नाजुक सीजफायर को भी खतरा हो सकता है

अपडेटेड Apr 10, 2026 पर 2:42 PM
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US-Iran Talks: आसिम मुनीर ने डिलीट कराया ख्वाजा आसिफ का इजरायल वाली सोशल मीडिया पोस्ट!

पाकिस्तान में सरकार, प्रधानमंत्री या मंत्री से ऊपर सेना का जनरल ही सबसे ताकतवर होता है, आज फिर एक बार ये बात सच साबित हो गई। भारतीय खुफिया सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने खुद दखल देकर रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का इजरायल वाला सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट करवा दिया। इससे साफ पता चलता है कि पाकिस्तान में फैसले लेने की प्रक्रिया में तनाव चल रहा है।

CNN-News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया, यह घटना पाकिस्तान के अंदर मिलिट्री और सिविल लीडरशिप के बीच बढ़ती खाई को दिखाती है। यह खाई इतनी बड़ी हो रही है कि पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच चल रही मध्यस्थता में अपना रोल ठीक से निभा पाने की स्थिति में नहीं रह गया है।

सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान के मंत्री "बहुत लापरवाही" से काम कर रहे हैं। वाशिंगटन अब इस्लामाबाद को अपने ही नेतृत्व को काबू में रखने में असमर्थ मान रहा है। इससे पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका कमजोर पड़ सकती है और अमेरिका-ईरान के बीच बने नाजुक सीजफायर को भी खतरा हो सकता है।


मध्यस्थता भूमिका पर चिंता

ख्वाजा आसिफ के बयान पर इजरायल समेत कई देशों की तेज प्रतिक्रिया आई। सूत्रों का कहना है कि जब सीजफायर की बातचीत अभी भी बहुत संवेदनशील दौर में थी, तब यह बयान आना ठीक नहीं था। इससे पाकिस्तान की न्यूट्रल मीडिएटर के रूप में विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।

सूत्रों ने चेतावनी दी कि अगर यह मध्यस्थता प्रक्रिया टूट गई, तो खाड़ी इलाके में फिर से लड़ाई शुरू हो सकती है। इससे दुनिया भर में तेल की कीमतें बहुत बढ़ जाएंगी। पाकिस्तान पर इसका सीधा असर पड़ेगा- ऊर्जा की कमी बढ़ेगी, महंगाई बढ़ेगी और उसकी अर्थव्यवस्था और कमजोर हो जाएगी।

इसके अलावा, अस्थिरता पाकिस्तान की पश्चिमी सीमाओं पर भी फैल सकती है, जिससे वहां आतंकवादी गतिविधियां बढ़ने का खतरा है।

आर्मी का दबदबा बरकरार

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की सेना, जिसके प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हैं, अभी भी विदेश नीति पर पूरा नियंत्रण रखे हुए है। चुनी हुई सरकार के पास बहुत कम अधिकार हैं।

इस घटना से साफ होता है कि महत्वपूर्ण कूटनीतिक मामलों, खासकर अमेरिका-ईरान बातचीत में, नेताओं को किनारे कर दिया जाता है। सेना खुद को रणनीतिक रूप से लचीला रखना चाहती है।

भारत इस पूरे मामले को पाकिस्तान की सिविल लीडरशिप यानी सरकार की अनुशासनहीनता और स्वायत्तता की कमी का सबूत मान रहा है। सूत्रों ने कहा कि असल में फैसले आर्मी ही ले रही है।

यह विवाद पाकिस्तान के लिए खुद का किया हुआ नुकसान माना जा रहा है। इससे पाकिस्तान की दुनिया भर में इज्जत और कम हो सकती है, हालांकि सेना की रणनीतिक स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है।

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