ईरान के प्राचीन शहर इस्फहान के आसमान में उस रात अचानक तेज रोशनी छा गई, जब एक बड़ी एयरस्ट्राइक की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि करीब 2000 पाउंड (900 Kg) का “बंकर बस्टर” बम शहर के पास मौजूद एक गोला-बारूद डिपो पर गिराया गया।
ईरान के प्राचीन शहर इस्फहान के आसमान में उस रात अचानक तेज रोशनी छा गई, जब एक बड़ी एयरस्ट्राइक की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि करीब 2000 पाउंड (900 Kg) का “बंकर बस्टर” बम शहर के पास मौजूद एक गोला-बारूद डिपो पर गिराया गया।
मौजूदा संघर्ष में ऐसे बंकर बस्टर बमों का काफी ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। इसकी वजह यह है कि ईरान ने अपनी सैन्य ताकत को बचाने के लिए जमीन के नीचे सुरंगों और ठिकानों का बड़ा नेटवर्क बना रखा है। इन अंडरग्राउंड ठिकानों में हथियार, कमांड सेंटर और जरूरी सैन्य संसाधन रखे जाते हैं, ताकि हवाई हमलों से बचा जा सके।
जमीन के नीचे बने इन ठिकानों का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इन्हें ऊपर से आसानी से देखा या निशाना नहीं बनाया जा सकता। साथ ही, आम बमों का असर भी इन पर कम पड़ता है।
कहां से आई ये रणनीति?
दरअसल, युद्ध में जमीन के नीचे छिपने की रणनीति नई नहीं है। World War I के दौरान भी सैनिकों ने खाइयों (ट्रेंच) का इस्तेमाल किया था, ताकि भारी गोलाबारी और हवाई हमलों से बचा जा सके।
इसके बाद World War II में फ्रांस की मैजिनो लाइन और जर्मनी के बर्लिन में बने अंडरग्राउंड बंकर जैसे बड़े ढांचे तैयार किए गए, जहां नेता और सेना सुरक्षित रह सकें।
इसी तरह के नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए अमेरिका-इजरायल गठबंधन अब बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल कर रहा है। इजरायल पहले भी गाजा और लेबनान में सुरंगों और बंकरों को निशाना बनाने के लिए ऐसे बमों का उपयोग कर चुका है। इसके लिए वह अपनी खुफिया जानकारी का सहारा लेता है।
पिछले साल जून में अमेरिका ने अपने B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स से खास तरह के GBU-57 “मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर” बम गिराए थे, जिनका निशाना ईरान के फोर्डो और नतांज जैसे अंडरग्राउंड परमाणु ठिकाने थे। ये ठिकाने पहाड़ों के अंदर बनाए गए थे, ताकि हवाई हमलों से बच सकें।
कैसे होते हैं बंकर बस्टर बम?
बंकर बस्टर बम खास तरीके से डिजाइन किए जाते हैं। इनका बाहरी हिस्सा मजबूत मेटल का होता है, जिससे ये कंक्रीट या जमीन को भेदकर अंदर तक पहुंच जाते हैं। इनका फ्यूज (धमाका करने वाला हिस्सा) सामान्य बमों की तरह आगे नहीं होता, बल्कि बीच में या पीछे होता है, ताकि अंदर घुसने के बाद तय दूरी पर जाकर विस्फोट हो सके।
आज के समय में ज्यादातर देशों की वायु सेनाओं के पास ऐसे बंकर बस्टर बम मौजूद हैं, क्योंकि अब सैन्य ठिकाने या तो जमीन के काफी नीचे बनाए जा रहे हैं या फिर मजबूत सुरक्षा वाले ढांचों में छिपाए जा रहे हैं, जिन्हें साधारण बमों से नष्ट करना मुश्किल होता है।
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