US-Iran War: 'बिना कैश कोई डील नहीं...'; ईरान ने अमेरिका संग जंग को अलग लेवल पर ही पहुंचाया, सरपंच बनने गए आसिम मुनीर के साथ ये क्या हुआ?
US-Iran War: ईरान के अमेरिकी लीडरशिप ने साफ कर दिया है कि 'बिना कैश कोई डील नहीं होगी' यानी जब तक तुरंत आर्थिक रियायतें नहीं मिलतीं तब तक वे किसी भी परमानेंट शांति समझौते पर साइन नहीं करेंगे। ईरान ने अमेरिका के साथ अपनी इस लड़ाई को एक बिल्कुल अलग ही लेवल पर पहुंचा दिया है
US-Iran War: ईरान के लीडरशिप ने साफ कर दिया है कि बिना कैश कोई डील नहीं होगी
US-Iran War: मिडिल ईस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग को रोकने के लिए पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर जो सरपंच यानी मध्यस्थ बनकर तेहरान गए थे, उन्हें वहां बहुत बड़ा झटका लगा है। त्वरित राजनयिक सफलता की अंतरराष्ट्रीय उम्मीदों को करारा झटका देते हुए आसिम मुनीर को शनिवार दोपहर को बिना किसी फाइनल शांति समझौते के ही ईरान की राजधानी से रवाना होना पड़ा।
अमेरिका और ईरान के इस बेहद खतरनाक महायुद्ध में डायरेक्ट मैसेंजर की भूमिका निभा रहे आसिम मुनीर की इस हाई-स्टेक मीटिंग का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ईरान के लीडरशिप ने साफ कर दिया है कि 'बिना कैश कोई डील नहीं होगी' यानी जब तक तुरंत आर्थिक रियायतें नहीं मिलतीं तब तक वे किसी भी परमानेंट शांति समझौते पर साइन नहीं करेंगे। ईरान ने अमेरिका के साथ अपनी इस लड़ाई को एक बिल्कुल अलग ही लेवल पर पहुंचा दिया है।
हमारी सहयोगी वेबसाइट 'न्यूज 18' की रिपोर्ट के मुताबिक हाइपर-वोलेटाइल हो चुके अमेरिका-ईरान विवाद को सुलझाने के लिए पाकिस्तानी और कतरी मध्यस्थों ने शनिवार को तेहरान में मैराथन बैठकें कीं। हालांकि फाइनल डील साइन नहीं हो सकी। लेकिन टॉप डिप्लोमैटिक सोर्सेज का मानना है कि शांति का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
दोनों देशों के बीच बातचीत की बारीक लकीर को बयां करते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि दोनों युद्धरत राजधानियां (तेहरान और वाशिंगटन) इस वक्त आम सहमति के बहुत दूर भी हैं और बहुत करीब भी। ईरान इस समय किसी दीर्घकालिक व्यापक संधि के बजाय वाशिंगटन के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू पर फोकस कर रहा है, ताकि पूर्ण पैमाने पर होने वाले विनाशकारी युद्ध को दोबारा शुरू होने से रोका जा सके।
ईरान का सीधा फॉर्मूला: बिना कैश, कोई डील नहीं
बैकचैनल सर्किट से जुड़े उच्च पदस्थ राजनयिक सूत्रों के मुताबिक शनिवार के गहन सत्र के दौरान ईरानी सरकार ने पाकिस्तानी मध्यस्थों और वहां मौजूद कतर के वार्ताकारों के सामने दो स्पष्ट ऑपरेशनल प्रपोजल रखे। इन दोनों ही प्रपोजल का केवल एक ही सख्त संदेश है- बिना कैश, कोई डील नहीं।
ईरान के इन दोनों प्रपोजल्स के रणनीतिक पैरामीटर्स बिल्कुल स्पष्ट हैं। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह से ब्लॉक हो चुके स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने की औपचारिक पेशकश की है। इसके खुलने से दुनिया की एक-चौथाई एनर्जी सप्लाई का रास्ता साफ हो जाएगा। लेकिन बदले में ईरान की शर्त है कि अमेरिका उसे बंदरगाहों और व्यापार को हुए नुकसान के लिए एक बड़ा और स्ट्रक्चर्ड फाइनेंशियल कॉम्पेन्सेशन (भारी वित्तीय मुआवजा) दे।
ईरानी डेलिगेशन ने मांग रखी है कि किसी भी प्रकार की फाइनल या डायरेक्ट द्विपक्षीय शांति वार्ता कानूनी रूप से शुरू होने से पहले अमेरिका को अपने सभी बैंकिंग प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना होगा और विदेशों में फ्रीज (जब्त) पड़े अरबों डॉलर के ईरानी फंड को तुरंत रिलीज करना होगा।
टोल गेट पर गतिरोध: मार्को रुबियो और गालिबाफ में तीखी बहस
वित्तीय मुआवजे की यह जिद असल में ईरान द्वारा फारस की खाड़ी में बनाए गए विवादित पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) से जुड़ी है। इसे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) संभालती है। इस अथॉरिटी ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षित पारगमन के लिए 2 मिलियन डॉलर (करीब 20 लाख डॉलर) प्रति जहाज तक का आक्रामक टोल टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है।
ईरान की इस आर्थिक मांग का वाशिंगटन में भारी विरोध हो रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस पर सीधे रेड-फ्लैग दिखाते हुए सख्त चेतावनी दी है। रुबियो ने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर ईरान का यह परमानेंट टोलिंग सिस्टम ट्रंप प्रशासन को किसी भी कीमत पर अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस भले ही बातचीत से समाधान चाहता है, लेकिन राष्ट्रपति के पास टेबल पर अन्य ऑप्शन्स भी मौजूद हैं। रुबियो का यह बयान उन खुफिया लीक्स के बीच आया है जिसमें कहा गया है कि अगर बैकचैनल डिप्लोमेसी फेल होती है तो अमेरिकी सेना नए स्ट्राइक्स करने की प्लानिंग पर एक्टिवली काम कर रही है।
अमेरिका को ईरान की खुली धमकी, दोबारा जंग छेड़ी तो परिणाम होंगे और कड़वे
वाशिंगटन के इस आक्रामक रुख का तेहरान में भी उसी भाषा में जवाब दिया गया। फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के रवाना होने से ठीक पहले ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने उन्हें सीधे शब्दों में चेतावनी दी। गालिबाफ ने कहा कि इस समय चल रहे अस्थिर सीजफायर के दौरान इस्लामिक रिपब्लिक ने अपने सभी मिलिट्री इंस्टालेशंस को पूरी तरह से मजबूत और फोर्टिफाई कर लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने दोबारा युद्ध शुरू करने की मूर्खता की तो ईरान का ऑपरेशनल रिस्पॉन्स युद्ध के शुरुआती दिनों की तुलना में कहीं अधिक विनाशकारी और कड़वा होगा।
फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों की समीक्षा करने के लिए वापस लौट गए हैं। इस बीच रीजनल सीजफायर को टूटने से बचाने के लिए इस्लामाबाद और दोहा यानी कतर के मध्यस्थ अगले हफ्ते की शुरुआत में ही बैठकों और वार्ताओं का एक और रैपिड राउंड आयोजित करने की कसरत में जुट गए हैं।