होर्मुज की निगरानी कर रहे IRGC नेवी के चीफ अलीरेजा तंगसिरी की हमले में हुई मौत!

यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।बंदर अब्बास होर्मुज जलडमरूमध्य के बिल्कुल पास है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। इसी रास्ते से दुनिया के करीब 20% तेल और गैस का व्यापार होता है

अपडेटेड Mar 26, 2026 पर 2:50 PM
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US Iran War: होर्मुज के पास हुए हमले में IRGC नेवी के चीफ अलीरेजा तंगसिरी की हुई मौत

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) नेवी के प्रमुख अलीरेजा तंगसीरी की बंदर अब्बास में हुए एक हमले में मौत हो गई है। यह जानकारी एक इजरायली अधिकारी ने दी। बंदर अब्बास ईरान का एक अहम बंदरगाह शहर है, जो होर्मुज जलडमरूमध् (Strait of Hormuz) के पास स्थित है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

बंदर अब्बास होर्मुज जलडमरूमध्य के बिल्कुल पास है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। इसी रास्ते से दुनिया के करीब 20% तेल और गैस का व्यापार होता है।

तंगसीरी की मौत को इस पूरे संघर्ष में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि IRGC नेवी ईरान की समुद्री रणनीति और खाड़ी क्षेत्र में उसकी ताकत का एक अहम हिस्सा है।


ईरान ने अहम समुद्री रास्ते पर पकड़ की मजबूत

ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना कंट्रोल औपचारिक तौर पर मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है। यह वही अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। ऐसे में सीजफायर की कोशिशें कमजोर पड़ती दिख रही हैं।

खबरों के मुताबिक, ईरान एक तरह का “टोल सिस्टम” लागू कर रहा है। इसके तहत गुजरने वाले जहाजों को अपना माल, क्रू की जानकारी और गंतव्य (कहां जा रहे हैं) की डिटेल ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड को देनी पड़ रही है।

शिपिंग से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह एक तरह का अनौपचारिक “टोल बूथ सिस्टम” है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कम से कम दो जहाजों ने इस रास्ते से गुजरने के लिए चीनी युआन में फीस भी दी है।

ईरान के सांसद मोहम्मदरेज़ा रेज़ाई कौची ने कहा कि संसद अब इस फीस सिस्टम को औपचारिक रूप देने पर काम कर रही है। उनका कहना है, “हम इस रास्ते की सुरक्षा देते हैं, इसलिए जहाजों और तेल टैंकरों का फीस देना स्वाभाविक है।”

ईरान के इस कदम से दुनिया के ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 104 डॉलर तक पहुंच गई है, जो इस संघर्ष के शुरू होने के बाद 40% से ज्यादा बढ़ चुकी है।

अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य ताकत

दूसरी ओर, अमेरिका ने भी इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। एक बड़ा स्ट्राइक ग्रुप, जिसमें USS Tripoli जहाज शामिल है, करीब 2,500 मरीन सैनिकों के साथ मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है।

इसके अलावा, 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 1,000 पैराट्रूपर्स को भी इस क्षेत्र में भेजा जा रहा है।

हालांकि, इन सैनिकों की तैनाती का मतलब तुरंत जमीनी युद्ध नहीं माना जा रहा, लेकिन इसका मकसद ईरान पर दबाव बनाना हो सकता है- ताकि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल दे या खाड़ी देशों पर हमले बंद करे।

अमेरिकी नौसेना के एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि 28 फरवरी से अब तक अमेरिका और इजरायल मिलकर 10,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले कर चुके हैं।

उन्होंने साफ कहा, “अभी हम रुके नहीं हैं… हमारा लक्ष्य ईरान की सैन्य ताकत को खत्म करना है।”

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