दुनिया के 20 से ज्यादा देशों ने कहा है कि वे होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए मदद करने को तैयार हैं। इन देशों ने ईरान की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि उसने इस बेहद अहम समुद्री रास्ते को लगभग बंद कर दिया है, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है।
एक संयुक्त बयान में 22 देशों- ज्यादातर यूरोप के, साथ ही यूएई और बहरीन ने साफ शब्दों में कहा कि वे खाड़ी क्षेत्र में ईरान के कदमों की निंदा करते हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान ने बिना हथियार वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले किए हैं, साथ ही तेल-गैस जैसे जरूरी ढांचों को भी निशाना बनाया है।
इन देशों ने यह भी कहा कि वे इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने मांग की कि नागरिक ढांचे, खासकर तेल और गैस से जुड़ी जगहों पर हमले तुरंत रोके जाएं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों और इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया।
इसका असर जहाजों की आवाजाही पर साफ दिख रहा है। आंकड़ों के मुताबिक 1 मार्च से 19 मार्च के बीच सिर्फ 116 जहाज इस रास्ते से गुजर पाए, जो सामान्य समय की तुलना में करीब 95% कम है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से आम तौर पर दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है। इसके लगभग बंद होने और मिडिल ईस्ट में ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमलों की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।
कुल मिलाकर, हालात काफी गंभीर हो गए हैं और अगर जल्दी समाधान नहीं निकला, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।