Iran Ceasefire Plan: मिडिल ईस्ट में तीन हफ्तों से जारी युद्ध को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दांव खेला है। इजरायल के 'चैनल 12' की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के पास एक 15-सूत्रीय शांति योजना का प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव के तहत एक महीने के युद्धविराम का सुझाव दिया गया है, ताकि दोनों पक्ष एक स्थायी समझौते पर बातचीत कर सकें। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और बातचीत का अगला दौर वहीं होने की संभावना है।
क्या है ट्रंप की 15-सूत्रीय योजना?
इस शांति प्रस्ताव को ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर ने तैयार किया है। पाकिस्तान के जरिए ईरान तक पहुंचाए गए इस प्रस्ताव की ये है मुख्य शर्तें:
परमाणु कार्यक्रम पर लगाम: ईरान को अपनी मौजूदा परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करना होगा और भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार न बनाने की शपथ लेनी होगी।
यूरेनियम संवर्धन: ईरानी धरती पर यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। साथ ही, 60% तक संवर्धित 450 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार IAEA को सौंपना होगा।
परमाणु ठिकानों को खत्म करना: नतांज, इस्फहान और फोर्डो जैसे परमाणु केंद्रों को पूरी तरह नष्ट करना होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य: इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए हमेशा खुला रखना होगा।
मिसाइल कार्यक्रम: ईरान के मिसाइल कार्यक्रम की रेंज और संख्या पर कड़ी सीमा तय की जाएगी। मिसाइलों का इस्तेमाल केवल आत्मरक्षा के लिए ही हो सकेगा।
प्रॉक्सी वॉर का अंत: ईरान को क्षेत्रीय समूहों को हथियार, पैसा और निर्देश देना बंद करना होगा।
बदले में ईरान को क्या मिलेगा?
अगर ईरान इन शर्तों को मान लेता है, तो उसे बड़े अंतरराष्ट्रीय फायदे दिए जाएंगे:
पाबंदियों से आजादी: ईरान पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को पूरी तरह हटा लिया जाएगा।
आर्थिक और तकनीकी मदद: अमेरिका ईरान को 'बुशहर' परमाणु संयंत्र में बिजली उत्पादन जैसे नागरिक परमाणु कार्यों में मदद करेगा।
'स्नैपबैक' का अंत: प्रतिबंधों को स्वचालित रूप से फिर से लागू करने वाला 'स्नैपबैक' तंत्र हटा दिया जाएगा।
इजरायल की चिंता और ईरान का रुख
इस शांति प्रस्ताव ने इजरायल के भीतर खलबली मचा दी है। इजरायल को डर है कि ट्रंप शर्तों को पूरी तरह लागू कराए बिना ही 'सिद्धांतिक समझौते' के चक्कर में युद्ध रोक देंगे, जिससे ईरान को फिर से मजबूत होने का मौका मिल जाएगा।
वैसे आधिकारिक तौर पर तेहरान ने अभी भी अमेरिका से किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे, तो वह खाड़ी के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले तेज कर देगा।