अमेरिका का नया 'टैरिफ बम'! भारत समेत 60 देशों पर लगेगा 12.5% तक एक्स्ट्रा टैक्स, इस वजह से लिया बड़ा एक्शन

US Tariff News: USTR ने यह फैसला ट्रेड एक्ट 1974 के 'सेक्शन 301' के तहत लिया है। अमेरिका का मानना है कि इन देशों की ढीली नीतियों के कारण अमेरिकी कामगारों के लिए ट्रेड फेयर नहीं रह गया है और इससे उन्हें वैश्विक स्तर पर एक असमान बाजार में प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है

अपडेटेड Jun 03, 2026 पर 10:53 AM
अमेरिकी व्यापार प्राधिकरण ने यह फैसला ट्रेड एक्ट 1974 के 'सेक्शन 301' के तहत लिया है।

US Tariff News: ग्लोबल ट्रेड के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। दुनिया के कई देशों पर एक बार फिर से ट्रंप टैरिफ का झटका लगने वाला है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कार्यालय ने भारत, चीन, यूरोपीय संघ और जापान समेत दुनिया की 60 अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले इंपोर्ट पर 12.5 प्रतिशत तक का एक्स्ट्रा सीमा शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है।

अमेरिका ने यह कदम एक बड़ी जांच के बाद उठाया है, जिसमें निष्कर्ष निकाला गया है कि ये देश अपने यहां 'बधुआ या जबरन मजदूरी' से बने सामानों के आयात पर रोक लगाने या नियमों को कड़ाई से लागू करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।

क्यों नाराज है अमेरिका?


अमेरिकी व्यापार प्राधिकरण ने यह फैसला ट्रेड एक्ट 1974 के 'सेक्शन 301' के तहत लिया है। अमेरिका का मानना है कि इन देशों की ढीली नीतियों के कारण अमेरिकी कामगारों के लिए ट्रेड का मैदान बराबरी का नहीं रह गया है।

असंतुलित बाजार: यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने कहा, 'हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात पर रोक न लगाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर एक असमान बाजार में प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। अमेरिका अब इस असमानता को बर्दाश्त नहीं करेगा'।

सस्ते सामान से बाजार खराब होने का दावा: रिपोर्ट में कहा गया है कि बधुआ मजदूरी के इस्तेमाल से कंपनियां बहुत कम लागत पर सामान तैयार कर लेती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें प्रभावित होती हैं और नियमों का उल्लंघन होता है।

ये है टैरिफ का पूरा गणित

अमेरिका ने अपनी प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत देशों को दो अलग-अलग टैरिफ स्लैब में रखा है:

10% टैरिफ रेट: यह उन अर्थव्यवस्थाओं पर लागू होगा जिन्होंने जबरन मजदूरी से जुड़े आयात पर पूर्ण या आंशिक रूप से कानूनी प्रतिबंध लगा रखा है।

12.5% टैरिफ रेट: यह उन देशों पर लगाया जाएगा जिन्होंने अपने यहां ऐसा कोई प्रतिबंधात्मक ढांचा या कानून लागू ही नहीं किया है। भारत इसी श्रेणी में शामिल है।

60 देशों की लिस्ट में भारत और चीन भी शामिल

USTR ने इस मामले में 12 मार्च 2026 को 60 अलग-अलग जांच शुरू की थी। ये देश मिलकर अमेरिका में होने वाले कुल आयात का 99.4 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं। भारत और चीन के अलावा इस सूची में ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड और कई खाड़ी देश शामिल हैं। कुल 54 देश कानून और इंफोर्समेंट दोनों मोर्चों पर फेल पाए गए।

भारत के संबंध में USTR ने साफ कहा कि देश 'जबरन श्रम आयात प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल' रहा है। भारत की यह नीतियां अमेरिकी वाणिज्य को बाधित करती हैं।

कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मैक्सिको और पाकिस्तान ऐसे देश पाए गए जहां कानून तो है, लेकिन वे इसे कड़ाई से लागू नहीं कर पा रहे हैं।

टेक्सटाइल और कपड़ों के लिए मिलेगी थोड़ी राहत?

अमेरिका ने इस कड़े प्रस्ताव के बीच कपड़ा उद्योग के लिए एक अलग 'टेक्सटाइल मैकेनिज्म' की भी बात कही है। इसके तहत कुछ चुनिंदा देशों से आने वाले अपैरल और टेक्सटाइल के एक सीमित वॉल्यूम को कम टैरिफ रेट पर अमेरिका में एंट्री मिल सकती है। हालांकि, USTR ने अभी यह साफ नहीं किया है कि इस राहत की श्रेणी में कौन से देश आएंगे।

डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल वाले कानून का हुआ इस्तेमाल

जिस 'सेक्शन 301' के तहत यह कार्रवाई की जा रही है, यह वही अमेरिकी व्यापार कानून है जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीनी आयात पर भारी टैरिफ लगाने के लिए किया था। इस कानून के तहत अमेरिका को यह अधिकार है कि अगर कोई विदेशी देश उसकी वाणिज्यिक गतिविधियों में बाधा डालता है, तो वह जवाबी व्यापारिक कदम उठा सकता है।

फिलहाल, इस USTR प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लेने से पहले अभी और समीक्षा और विचार-विमर्श किया जाना बाकी है।

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