अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पर दोबारा टाला अपना फैसला

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 14 जनवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पर अपना फैसला नहीं सुनाया। उसने दोबारा इस मसले पर अपना फैसला टाला। इससे पहले 9 जनवरी को उम्मीद थी कि वह इस मामले में अपना फैसला सुनाएगा

अपडेटेड Jan 14, 2026 पर 9:56 PM
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इससे पहले अमेरिका में तीन कोर्ट्स ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ फैसला सुना चुके हैं।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पर एक बार फिर अपना फैसला टाल दिया। 14 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के इस मसले पर अपना फैसला सुनाने की उम्मीद की जा रही थी। इससे पहले 9 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में अपना फैसला देने की उम्मीद थी। लेकिन, उस दिन भी कोर्ट ने फैसला टाल दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों में टैरिफ का मामला शामिल नहीं

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 14 जनवरी को तीन मामलों में फैसले सुनाए। लेकिन, इनमें ट्रंप के टैरिफ का मामला शामिल नहीं था। दुनियाभर की नजरें आज अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पर लगी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नहीं बताया कि वह ट्रंप के टैरिफ पर फैसला कब सुनाएगा। आम तौर पर अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट यह नहीं बताता है कि किस मामले में किस दिन वह फैसला सुनाएगा।


तीन अमेरिकी कोर्ट्स ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ फैसले दे चुके हैं

इससे पहले अमेरिका के तीन कोर्ट इस मामले में ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ अपना फैसला सुना चुके हैं। उनका मानना था कि ट्रंप ने जिस कानून के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाया है, वह सही नहीं है। इन कोर्ट्स का मानना है कि ट्रंप ने टैरिफ लगातार अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया। पिछले साल अप्रैल में ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया था। फिर उसे तीन महीनों के लिए टाल दिया था। आखिर में जुलाई में रेसिप्रोकल टैरिफ लागू हो गया।

14 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लगी थीं दुनियाभर की नजरें

एनालिस्ट्स का कहना है कि इस मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इसलिए नजरें लगी हैं, क्योंकि इसका व्यापक असर पड़ेगा। अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप के खिलाफ आता है तो इसे उनके लिए बड़ा झटका माना जाएगा। इससे मनमाना फैसले लेने की उनकी आदत पर अंकुश लग सकता है। पिछले साल जनवरी में दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद ट्रंप ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिन पर सवाल खड़े हुए हैं। ताजा मामला वेनेजुएला पर हमले का है।

ट्रंप ने 1977 के एक कानून का इस्तेमाल दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने के लिए किया

ट्रंप ने इंटरनेशनल इमर्जेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत दूसरे देशों पर टैरिफ लगाया है। ट्रंप के इस फैसले का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि 1977 के इस कानून का इस्तेमाल दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। लेकिन, ट्रंप के समर्थकों का कहना है कि ट्रंप ने टैरिफ लगाकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया है। उनका यह भी कहना है कि ट्रंप ने देश के हित में यह बड़ा फैसला लिया है।

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ट्रंप ने भारत पर लगाया है सबसे ज्यादा 50 फीसदी टैरिफ

अमेरिका राष्ट्रपति ने सबसे ज्यादा टैरिफ भारत पर लगाया है। पहले उन्होंने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। फिर रूस से क्रूड ऑयल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया। ट्रंप ने कहा कि उसने पेनाल्टी के रूप में भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया है। ट्रंप का मानना है कि भारत और चीन जैसे देश रूस से तेल खरीदते हैं। इससे रूस को पैसे मिलते हैं। वह इस पैसे का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए करता है।

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