अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन ने अपनी नौसेना के एक बड़े बेड़े, जिसे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कहा जाता है, को दक्षिण चीन सागर से हटाकर मध्य पूर्व (Middle East) भेजने का फैसला किया है। अमेरिका की 'न्यूज नेशन' नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम ईरान और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए उठाया गया है। ईरान इस समय अपनी खराब अर्थव्यवस्था और भारी महंगाई के कारण बड़े जन-आक्रोश और सरकार विरोधी प्रदर्शनों का सामना कर रहा है।
माना जा रहा है कि इस सैन्य बेड़े की कमान USS अब्राहम लिंकन एयर क्राफ्ट कैरियर के पास है। इसके साथ कई युद्धपोत और कम से कम एक अटैक सबमरीन भी भेजी जा रही है, जिसे मिडिल ईस्ट पहुंचने में लगभग एक हफ्ते का समय लगेगा। यह तैनाती अमेरिकी सेना के सेंटकॉम (CENTCOM) इलाके में की जा रही है, जिसकी जिम्मेदारी में मिस्र, इराक, अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान जैसे 21 देश आते हैं।
तनाव इतना बढ़ गया है कि कतर में स्थित अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डे, अल उदेद (Al Udeid) से कुछ कर्मचारियों को एहतियात के तौर पर वहां से हटने की सलाह दी गई है। साथ ही, सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी अपने स्टाफ को सतर्क रहने और जरूरी न होने पर यात्रा न करने के निर्देश दिए हैं।
ईरान के पड़ोसी देश इस स्थिति से काफी डरे हुए हैं। उन्हें डर है कि अगर अमेरिका ईरान पर कोई भी सैन्य हमला करता है, तो इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था बिगड़ जाएगी। इसी चिंता में कई पड़ोसी देशों की सरकारें ट्रंप प्रशासन से सीधे बातचीत कर रही हैं ताकि इस संकट को और बढ़ने से रोका जा सके।
इन समुद्री रास्तों पर पड़ेगा इस तनाव का असर
ईरान और अमेरिका के बीच इस तनाव का सबसे बड़ा असर समुद्री व्यापार के 'चोक पॉइंट्स' (Choke Points) पर पड़ेगा। अगर यहां हलचल बढ़ती है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और सामान की सप्लाई रुक सकती है।
यहां उन 3 अहम रास्तों के बारे में जानकारी दी गई है, जो सबसे ज्यादा खतरे में हैं:
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)
यह ईरान के ठीक नीचे स्थित है और दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। दुनिया का लगभग 20% से 30% तेल यहीं से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, UAE और कुवैत का तेल इसी रास्ते से भारत और बाकी दुनिया तक पहुंचता है।
ईरान ने कई बार धमकी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह इस रास्ते को बंद कर देगा। अगर ऐसा हुआ, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था ठप हो सकती है।
बाब-अल-मंडेब (Bab al-Mandab Strait)
यह लाल सागर (Red Sea) के मुहाने पर स्थित है, जो एशिया को यूरोप से जोड़ता है। स्वेज नहर (Suez Canal) जाने वाले सभी जहाज यहीं से गुजरते हैं।
यहां ईरान समर्थित हुती विद्रोही सक्रिय हैं। तनाव बढ़ने पर वे मालवाहक जहाजों (Cargo Ships) पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर सकते हैं, जैसा कि हाल के महीनों में देखा गया है।
ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman)
यह होर्मुज और अरब सागर के बीच का हिस्सा है। हाल के सालों में यहां कई तेल टैंकरों पर रहस्यमयी हमले और कब्जे हुए हैं। अमेरिकी नौसेना का बेड़ा (USS Abraham Lincoln) इसी क्षेत्र में तैनात होकर अपनी ताकत दिखाना चाहता है, ताकि व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा दी जा सके।