US Treasury Secretary: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर दिया है। बेसेंट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ के बाद नई दिल्ली ने अपने आयात में यह बड़ा बदलाव किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वॉशिंगटन उन देशों पर 500 प्रतिशत तक भारी जुर्माना लगाने पर विचार कर रहा है जो अब भी रूस से तेल खरीद रहे हैं।
स्कॉट बेसेंट ने क्या-क्या किया दावा
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बेसेंट ने ट्रंप प्रशासन की सख्त व्यापार नीति का बचाव करते हुए कहा, 'यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद भारत ने रूसी तेल खरीदना शुरू किया था। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने उन पर 25% टैरिफ लगाया, जिसके बाद भारत ने धीरे-धीरे अपनी खरीद कम की और अब रूसी तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर दिया है।' बेसेंट ने यूरोप की आलोचना करते हुए कहा कि वे 4 साल बाद भी रूसी तेल खरीदकर खुद के खिलाफ युद्ध को फंड कर रहे हैं। वहीं, चीन को इस प्रस्तावित 500% टैरिफ का मुख्य निशाना बताया।
500% टैरिफ वाला 'रूस प्रतिबंध विधेयक' क्या है?
यह पूरा विवाद अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किए गए एक नए विधेयक से जुड़ा है। इस प्रस्ताव के तहत अगर कोई देश रूस से तेल खरीदता है, तो अमेरिका उस देश से आने वाले सामानों पर कम से कम 500% टैरिफ लगा सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बिल को राजनीतिक मंजूरी दे दी है, हालांकि यह अभी अमेरिकी सीनेट में लंबित है। बेसेंट का मानना है कि ट्रंप को इस टैरिफ को लागू करने के लिए सीनेट की अनुमति की जरूरत नहीं है, वे इसे IEPA (इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट) के तहत खुद भी कर सकते हैं।
क्या वास्तव में भारत ने रूसी तेल खरीद बंद की है?
हालांकि, अमेरिका इसे अपनी जीत बता रहा है, लेकिन भारत का आधिकारिक रुख थोड़ा अलग रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने पहले स्पष्ट किया था कि तेल खरीद के फैसले भू-राजनीति के बजाय 'मार्केट डायनेमिक्स' और डिस्काउंट कम होने के कारण लिए जा रहे है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत 500% टैरिफ वाले बिल पर बारीकी से नजर रख रहा है और अपने 140 करोड़ लोगों के लिए सस्ती ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। वैसे 'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वास्तव में पिछले कुछ महीनों में रूसी तेल के आयात में भारी कटौती की है, और अमेरिका से तेल के आयात में वृद्धि हुई है।