Oxford Union Debate: कहते हैं जब सच्चाई और तर्क एक साथ हों, तो भारी-भरकम शब्दों की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ ऐसा ही नजारा दुनिया की मशहूर डिबेटिंग सोसाइटी 'ऑक्सफोर्ड यूनियन' में देखने को मिला। वहां बहस का मुद्दा था 'क्या भारत की पाकिस्तान नीति केवल चुनावी लोकप्रियता के लिए है?' इस मौके पर जब पाकिस्तान की ओर से बड़े-बड़े दावों के गुब्बारे छोड़े जा रहे थे, तब मुंबई के एक लॉ स्टूडेंट वीरांश भानुशाली ने अपनी धारदार दलीलों से उन गुब्बारों की हवा निकाल दी।
'भाषण नहीं, कैलेंडर ही काफी है'
वीरांश ने अपनी बात की शुरुआत किसी भारी-भरकम थ्योरी से नहीं, बल्कि एक 'कैलेंडर' से की। उन्होंने कहा, 'इस डिबेट को जीतने के लिए मुझे किसी लफ्फाजी की जरूरत नहीं है। मुझे बस एक कैलेंडर की जरूरत है।' उन्होंने इतिहास की तारीखों को गवाह बनाकर पाकिस्तान के उस नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया, जिसमें कहा जाता है कि भारत केवल 'वोट' के लिए पाकिस्तान पर कड़ा रुख अपनाता है।
वीरांश ने बहस को व्यक्तिगत अनुभव से जोड़ा। उन्होंने याद दिलाया जब मार्च 1993 में मुंबई के प्लाजा सिनेमा में RDX धमाके हुए और 257 लोग मारे गए। वीरांश ने पूछा, 'क्या उस वक्त कोई चुनाव था? नहीं, चुनाव 3 साल दूर थे। वह वोट के लिए नहीं, बल्कि दाऊद और ISI द्वारा भारत की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के लिए किया गया 'युद्ध' था।'
वीरांश ने बताया कि 26/11 का जब आतंकी अटैक हुआ था तब उस वक्त वो स्कूल में थे। उनकी बुआ हर शाम उसी CSMT स्टेशन से गुजरती थीं जहां कसाब ने गोलियां बरसाई थीं। उस रात किस्मत से उन्होंने दूसरी ट्रेन पकड़ी थी। उन्होंने कहा, 'जब कोई कहता है कि पाकिस्तान पर हमारा कड़ा रुख महज चुनावी स्टंट है, तो मुझे तकलीफ होती है क्योंकि मैंने वो डर जिया है।'
संयम बनाम सर्जिकल स्ट्राइक
वीरांश ने कहा कि 2008 के बाद भारत ने संयम बरता, लेकिन बदले में क्या मिला? पठानकोट, उरी और पुलवामा! उन्होंने कहा 'अगर भारत का रुख 'पॉपुलिस्ट' होता, तो कसाब के हमले के अगले दिन ही हमारे जेट्स सीमा पार बम गिरा रहे होते। लेकिन हमने संयम दिखाया, जिसका फायदा पाकिस्तान ने फिर से आतंक फैलाने में उठाया।'
जब भारत ने हाल के वर्षों में सर्जिकल स्ट्राइक से जवाब दिया, तो उसे 'चुनावी ड्रामा' कहने वालों को वीरांश ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'हमने गुनहगारों को सजा दी और रुक गए। हमने न कब्जा किया, न युद्ध। यह 'पॉपुलिज्म' नहीं, बल्कि 'प्रोफेशनलिज्म' है।'
वीरांश ने दोनों देशों के बीच का अंतर एक ही लाइन में समझा दिया। उन्होंने कहा, 'जब भारत युद्ध लड़ता है, तो हम अपने पायलटों से 'डीब्रीफिंग' लेते हैं। लेकिन पाकिस्तान में? वे वहां कोरस को 'ऑटो-ट्यून' करके गाने बनाते हैं!'
'हमें बस एक बोरिंग पड़ोसी चाहिए'
अपनी बात खत्म करते हुए वीरांश ने बड़े कूल अंदाज में कहा कि भारत को लड़ाई का शौक नहीं है। 'हम तो बस 'बोरिंग पड़ोसी' बनकर रहना चाहते हैं, जो एक-दूसरे को प्याज और बिजली बेचें। लेकिन जब तक सामने वाला आतंक को अपनी विदेश नीति का हिस्सा बनाए रखेगा, हम अपनी बारूद को सूखा रखेंगे। अगर यह 'पॉपुलिज्म' है, तो हां, मैं पॉपुलिस्ट हूं।'