Iran 1979 Revolution: ईरान ने बुधवार को अपनी 1979 की इस्लामी क्रांति की 47वीं वर्षगांठ मनाई। हालांकि, ईरान में इस बार जश्न के शोर से ज्यादा चर्चा युद्ध की आहट और आंतरिक विद्रोह की है। एक तरफ राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन 'आजादी स्क्वायर' से अमेरिका को चुनौती दे रहे थे, तो दूसरी तरफ ओमान और कतर में परमाणु डील को बचाने की आखिरी कोशिशें जारी थी। इस सब के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'आर्मडा' यानी नौसैनिक बेड़ा खाड़ी में तेहरान को सीधी चेतावनी दे रही है।
'झुकेंगे नहीं, दुश्मन को देंगे मुंहतोड़ जवाब'
राजधानी तेहरान के आजादी स्क्वायर में उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पेजेशकियन ने साफ कर दिया कि ईरान, वाशिंगटन के आगे घुटने नहीं टेकेगा। हालांकि, उनके भाषण में कूटनीति की गुंजाइश भी दिखी। उन्होंने कहा कि ईरान शांति के लिए पड़ोसियों के साथ संवाद जारी रखेगा। परमाणु कार्यक्रम पर उठते सवालों के जवाब में उन्होंने एक बार फिर इसे पूरी तरह 'शांतिपूर्ण' बताया और कहा कि ईरान किसी भी अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार है।
ट्रंप की चेतावनी और नेतन्याहू का दबाव
उधर, व्हाइट हाउस में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मुलाकात के बाद ट्रंप के तेवर कड़े नजर आए। हालांकि, ट्रंप ने बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं, लेकिन उन्होंने सैन्य कार्रवाई के विकल्प को खारिज नहीं किया है। नेतन्याहू का जोर इस बात पर है कि किसी भी नए समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी शामिल किया जाए। गौर करने वाली बात यह है कि ट्रंप का रुख प्रदर्शनकारियों के समर्थन से ज्यादा परमाणु हथियारों को रोकने पर केंद्रित है।
'तानाशाह की मौत'- घरों की छतों से गूंजे बगावती नारे
क्रांति के जश्न के समानांतर ईरान की गलियों में एक अलग ही कहानी लिखी जा रही है। मंगलवार रात को जब सरकार आतिशबाजी कर रही थी, तब तेहरान की बालकनियों से 'तानाशाह की मौत' (Death to the Dictator) के नारे सुनाई दे रहे थे। मानवाधिकार समूह HRANA के मुताबिक, पिछले एक महीने में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 7,002 लोग मारे जा चुके हैं और करीब 52,941 लोग गिरफ्तार हुए हैं। इस बार सरकारी रैलियों में कुछ महिलाएं बिना हिजाब के भी दिखीं, जिसे शासन की बदलती रणनीति या बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है।
युद्ध के बादलों के बीच पर्दे के पीछे की बातचीत भी तेज है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने पिछले शुक्रवार को ओमान में बातचीत की है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारीजानी भी ओमान और कतर के दौरों पर हैं, ताकि क्षेत्रीय तनाव को कम किया जा सके। खाड़ी देश फिलहाल 'बफर जोन' की भूमिका निभा रहे हैं ताकि मामला सीधे टकराव तक न पहुंचे।