West Asian Tension Impact on Pakistan: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने भारत के पड़ोसी पाकिस्तान के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि एक तरफ पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार को समझ नहीं आ रहा कि आखिर इस चुनौती से कैसे मुकाबला किया जाए। आर्थिक संकट और खर्च कम करने की कोशिशों के बीच पाकिस्तान सरकार ने 23 मार्च को होने वाली मिलिट्री परेड डे के सभी बड़े कार्यक्रम रद्द करने का फैसला किया है। सरकार ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में तेल संकट और बढ़ते खर्च को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि मिलिट्री परेड जैसे बड़े कार्यक्रम रद्द करने का फैसला इसलिए लिया गया है ताकि देश आर्थिक बचत के उपायों के साथ आगे बढ़ सके और साथ ही पाकिस्तान डे के मूल्यों के प्रति सम्मान भी बना रहे। सरकार ने सभी मंत्रालयों और दफ्तरों को निर्देश दिया है कि इस दिन को सादगी और गरिमा के साथ मनाया जाए। वहीं, माना जा रहा है कि, इस फैसले को पाकिस्तान में बढ़ते आर्थिक संकट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब इसका असर उन कार्यक्रमों पर भी पड़ रहा है जो देश की सैन्य ताकत और प्रतिष्ठा से जुड़े होते हैं।
जंग के बीच पाकिस्तान का हाल बेहाल
सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान सेना की अनुमानित ताकत और उसकी सीमित आर्थिक क्षमता के बीच एक गंभीर खाई पैदा हो गई है। पश्चिम एशिया में तेल संकट ने पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरियों को और उजागर कर दिया है, क्योंकि देश आयात पर काफी निर्भर है, विदेशी मुद्रा भंडार कम है और उस पर भारी कर्ज भी है। इन वजहों से पाकिस्तान बाहरी परिस्थितियों पर ज्यादा निर्भर होता जा रहा है। इसी बीच सरकार ने हाल ही में अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए खर्च में कटौती की योजना भी लागू की है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आर्थिक हालात को देखते हुए खर्च कम करने के लिए कई सख्त फैसले लिए हैं। इसके तहत सरकारी कंपनियों और स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों के वेतन में 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती को मंजूरी दी गई है। साथ ही सरकारी विभागों में इस्तेमाल होने वाले करीब 60 प्रतिशत वाहनों को हटाने और मंत्रियों, सांसदों व अधिकारियों के गैर-जरूरी विदेश दौरों पर रोक लगाने का फैसला भी किया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और इसका असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।