Iranian Attack Boats: मिडिल ईस्ट में तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति को लेकर बातचीत विफल होने के बाद अब जंग 'आर-पार' में बदलता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलसंधि की नाकेबंदी शुरू करते हुए ईरान को सीधी चेतावनी दी है कि, 'अगर इनमें से एक भी जहाज हमारे ब्लॉकेड के करीब आया, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा।'
दरअसल ट्रंप के इस चेतावनी का इशारा ईरान की उन 'फास्ट अटैक बोट्स' की ओर है, जो आकार में तो छोटी हैं, लेकिन समंदर में बड़े-बड़े जंगी जहाजों के लिए काल बन सकती हैं। आइए आपको बताते हैं क्या हैं ये बोट्स और ये इतनी खतरनाक क्यों हैं?
क्या होती हैं 'फास्ट अटैक बोट्स'?
ये बड़े युद्धपोत नहीं, बल्कि छोटी और बेहद तेज रफ्तार वाली नावें हैं। इनका संचालन मुख्य रूप से ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी' (IRGCN) करती है। इनकी ताकत इनकी संख्या और बिजली जैसी फुर्ती में है। ईरान के पास अलग-अलग श्रेणियों की घातक नावें हैं:
तोंदर-क्लास (Tondar-class): ये इस बेड़े के सबसे भारी हथियार हैं। ये लगभग 40 मीटर लंबी होती हैं और 120 किमी की दूरी तक मार करने वाली सी-802 क्रूज मिसाइलों से लैस हैं। ये दूर से ही दुश्मन के टैंकरों को उड़ा सकती हैं।
पेकाप-क्लास (Peykaap-class): ये 'स्वार्म टैक्टिक्स' यानी झुंड में हमला के लिए बनी हैं। इनकी रफ्तार 90 किमी/घंटा से ज्यादा है और ये हल्की एंटी-शिप मिसाइलों से लैस होती हैं।
सेराज-क्लास (Seraj-class): इन्हें दुनिया की सबसे तेज रेसिंग बोट्स की तर्ज पर बनाया गया है। 110 किमी/घंटा की रफ्तार वाली ये नावें 'हिट एंड रन' मिशन के लिए माहिर हैं।
जुल्फिकार-क्लास (Zolfaghar-class): ये रडार की नजर से बचने में सक्षम हैं और रात में भी हमला कर सकती हैं। इनकी रफ्तार 110 किमी/घंटा से अधिक है।
सुसाइड ड्रोन बोट्स: ईरान ने ऐसी रिमोट कंट्रोल नावें भी बनाई हैं जो बारूद से भरी होती हैं। ये 'कामीकाजे' ड्रोन की तरह दुश्मन के जहाज से टकराकर खुद को उड़ा लेती हैं।
अकेले एक नाव अमेरिकी युद्धपोत का मुकाबला नहीं कर सकती, लेकिन ईरान इनका इस्तेमाल 'झुंड' में करता है। ये बोट्स स्वार्म अटैक तकनीक के तहत हमला करती है जिसमें दर्जनों नावें एक साथ अलग-अलग दिशाओं से एक बड़े जहाज को घेर लेती हैं। इससे जहाज का डिफेंस सिस्टम कंफ्यूज हो जाता है। भीड़भाड़ वाले समुद्री रास्ते में ये नावें आम नागरिक नावों जैसी दिखती हैं, जिससे अमेरिकी सेना के लिए 'दोस्त या दुश्मन' की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। एक अमेरिकी युद्धपोत अरबों डॉलर का होता है, जबकि ये नावें बेहद सस्ती हैं। ईरान इनका नुकसान सह सकता है, लेकिन अगर एक भी नाव सफल हुई, तो वह अरबों के जहाज को डुबो सकती है।
होर्मुज की भूगोल और ईरान की रणनीति
होर्मुज जलसंधि बहुत संकरी है। यहां बड़े अमेरिकी जहाजों को मुड़ने या पैंतरेबाजी करने के लिए जगह कम मिलती है। ईरानी नावें तटों के पास छिप सकती हैं और अचानक निकलकर हमला कर सकती हैं। दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान इन नावों का इस्तेमाल कमर्शियल टैंकरों को डराने या उन्हें बंधक बनाने के लिए भी करता है।
ट्रंप ने पहले इन नावों को नजरअंदाज किया था, लेकिन अब रणनीति बदल गई है। अमेरिका को डर है कि ये नावें 'हार्मोनिक' ब्लॉकेड को तोड़ सकती हैं या सुसाइड मिशन के जरिए अमेरिकी जहाजों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसीलिए साफ-साफ ये आदेश दिया गया है कि, 'देखते ही खत्म कर दो'।