Hormuz Blockade: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना ने अपनी रणनीति में एक बड़ा और हैरान करने वाला बदलाव किया है। दरअसल अमेरिका का विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (CVN-77) फिलहाल नामीबिया के तट के पास है और पूरे अफ्रीकी महाद्वीप का चक्कर लगाकर अरब सागर की ओर बढ़ रहा है। आखिर अमेरिका ने स्वेज नहर वाला छोटा रास्ता छोड़कर हजारों मील लंबा रास्ता क्यों चुना? आइए आपको बताते हैं इस 'वॉर गेम' के पीछे की पूरी कहानी।
रेड सी में हुती विद्रोहियों के 'खौफ' से बदला रास्ता
आमतौर पर अमेरिकी जहाज भूमध्य सागर और स्वेज नहर के रास्ते मिडिल ईस्ट पहुंचते हैं, लेकिन इस बार रास्ता बदल दिया गया है। 2024 और 2025 में लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में अमेरिकी जहाजों पर हुती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने भारी जोखिम बढ़ा दिया है।
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जोखिम से बचने के लिए जंगी बेड़े को अफ्रीका के नीचे से केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजा जा रहा है। आखिरी बार दिसंबर 2023 में USS ड्वाइट डी. आइजनहावर ने इस खतरनाक रास्ते को पार किया था, जिसके बाद से किसी कैरियर ने यह हिम्मत नहीं दिखाई।
कौन-कौन से घातक हथियार साथ हैं?
यह केवल एक जहाज नहीं, बल्कि एक पूरा चलता-फिरता 'किला' है। इस बेड़े के साथ तीन विनाशकारी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर- USS डोनाल्ड कुक, USS मेसन, और USS रॉस चल रहे हैं। ईंधन और रसद के लिए USNS आर्कटिक भी साथ है, जो समुद्र के बीच में ही बेड़े की जरूरतों को पूरा करता है।
होर्मुज की नाकेबंदी की तैयारी तेज
यह बेड़ा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की उस नाकेबंदी में शामिल होगा, जिसका आदेश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को दिया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने होर्मुज की नाकेबंदी को लेकर नियम साफ कर दिए हैं। किसी भी देश का जहाज जो ईरानी बंदरगाहों पर जा रहा है या वहां से आ रहा है, उसे रोका जाएगा। गैर-ईरानी बंदरगाहों जैसे- UAE या ओमान की ओर जाने वाले जहाजों को नहीं रोका जाएगा। सोमवार सुबह 10 बजे के बाद से 'ग्रेस पीरियड' खत्म हो गया है। अब बिना अनुमति के इलाके में आने-जाने वाले जहाजों को जब्त या डायवर्ट किया जा सकता है। मानवीय सहायता को जांच के बाद इजाजत दी जाएगी।
समुद्र में हो रही 'जंग' की तैयारी
अमेरिकी नौसेना के प्रमुख एडमिरल डेरिल कॉडल ने इसे एक 'विशाल कार्य' बताया है। उनके अनुसार, इस नाकेबंदी को लागू करने में कई बड़े खतरे हैं। ईरान ने समुद्र में माइंस बिछा रखी हैं, जिन्हें हटाने के लिए अमेरिकी डिस्ट्रॉयर USS माइकल मर्फी पहले ही तैनात है। इसके साथ ही आसमान में ईरानी वायुसेना से टकराव का खतरा हमेशा बना हुआ है।
USS जॉर्ज बुश के पहुंचने के बाद अरब सागर में अमेरिकी शक्ति दोगुनी हो जाएगी। वहां पहले से ही USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ तैनात है। साथ ही समुद्र और जमीन दोनों पर हमला करने में सक्षम USS त्रिपोली (LHA-7) एम्फीबियस ग्रुप भी इलाके में मौजूद है।