Ajay Banga: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में संघर्ष को खत्म करने और शांति बहाली के लिए एक उच्च स्तरीय 'शांति बोर्ड' के गठन की घोषणा की है। इस बोर्ड में विश्व बैंक के अध्यक्ष और भारतीय मूल के अजय बंगा को एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में चुना गया है। ट्रंप खुद इस बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे। यह बोर्ड ट्रंप के '20-सूत्रीय शांति कार्यक्रम' के दूसरे चरण की निगरानी करेगा। ट्रंप खुद इस बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें उनके साथ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पूर्व ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर जैसे कई प्रमुख नाम शामिल हैं। अजय बंगा की नियुक्ति इस अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में उनके वैश्विक आर्थिक अनुभव और कूटनीतिक कौशल की महत्ता को दर्शाती है।
महाराष्ट्र के खड़की में जन्मे अजय बंगा ने एक आर्मी ऑफिसर के बेटे से लेकर विश्व बैंक के शिखर तक का सफर तय किया है। बंगा ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक और आईईएम (IIM) अहमदाबाद से मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। भारत सरकार ने उन्हें 2016 में पद्म श्री से सम्मानित किया। उन्हें सिंगापुर का पब्लिक सर्विस स्टार और एलिस आइलैंड मेडल ऑफ ऑनर भी मिल चुका है।
अजय बंगा फिलहाल विश्व बैंक के 14वें अध्यक्ष हैं। उन्हें फरवरी 2023 में जो बाइडन ने नामित किया था और उन्होंने जून 2023 में कार्यभार संभाला। उनका लक्ष्य 80 साल पुराने इस संस्थान को अधिक कुशल और प्रभावशाली बनाना है। विश्व बैंक से पहले वे मास्टरकार्ड के सीईओ और जनरल अटलांटिक के वाइस चेयरमैन भी रह चुके है।
गाजा पीस बोर्ड में कौन-कौन है शामिल?
गाजा में शांति बहाली के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने 'गाजा शांति बोर्ड' का गठन किया है। ट्रंप खुद इस पूरे मिशन का नेतृत्व कर रहे हैं। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा गाजा के पुनर्निर्माण और आर्थिक रणनीति की जिम्मेदारी संभालेंगे। इस हाई-प्रोफाइल टीम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो कूटनीतिक कमान संभाल रहे है और यूनाइटेड किंगडम के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर अंतरराष्ट्रीय संबंधों का नेतृत्व करेंगे। वहीं, ट्रंप के दामाद और पूर्व सलाहकार जेरेड कुशनर मध्य पूर्व में अपने पुराने अनुभवों के आधार पर रणनीतिक सलाह देंगे। इनके अलावा बोर्ड में स्टीव विटकॉफ, मार्क रोवन और रॉबर्ट गेब्रियल जैसे दिग्गज भी शामिल हैं, जो गाजा में बुनियादी ढांचे के विकास, निवेश जुटाने और शासन क्षमता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विभागों की निगरानी करेंगे।