Bilal Arif Sarafi: पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के खूंखार कमांडर बिलाल आरिफ सराफी की शनिवार (22 मार्च) को पाकिस्तान में ईद की नमाज के बाद उसके अपने ही परिवार वालों ने चाकू और गोली मारकर हत्या कर दी। NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना मुरीदके में मरकज के पास स्थित आतंकी संगठन लश्कर के तबाह हो चुके मुख्यालय के पास हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि हत्या के पीछे का सही मकसद अभी तक साफ नहीं हो पाया है।
हालांकि खुफिया सूत्रों को शक है कि इसकी वजह कोई पारिवारिक विवाद हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस हत्या में शामिल हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया गया है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें घटना के बाद का भयावह मंजर दिख रहा है। वायरल वीडियो में सराफी जमीन पर बेसुध पड़ा दिखाई दे रहा है। हालांकि, इन क्लिप्स की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
पाकिस्तान पर लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि वह अपनी विदेश नीति के औजार के तौर पर आतंकवादी नेटवर्क को पनाह देता है। अब उसे अपने ही देश की सीमाओं के भीतर इसके बढ़ते हुए बुरे नतीजों का सामना करना पड़ रहा है। 'ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026' के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान पहली बार दुनिया का सबसे ज्यादा आतंकवाद-प्रभावित देश बन गया।
पिछले साल पाकिस्तान में 1,045 आतंकी हमले हुए जिसमें 1,139 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा पूरे पाकिस्तान में 655 लोगों को बंधक बनाया गया। पूरे दक्षिण एशिया में पाकिस्तान ही एकमात्र ऐसा देश था जहां 2025 में सुरक्षा की स्थिति और खराब हुई।
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, बिलाल आरिफ सराफी ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके केंद्र में भर्ती प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई थी। वह पाकिस्तानी युवाओं की पहचान करके उन्हें संगठन के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता था। बताया जाता है कि इस प्रक्रिया के तहत वह वैचारिक ट्रेनिंग देने में भी शामिल था। उसका काम लोगों को ट्रेनिंग देकर उनका ब्रेनवॉश करना था।
अपनी हत्या से पहले सराफी को कथित तौर पर LeT के लिए भर्ती और फंड जुटाने का काम सौंपा गया था। जांच अधिकारियों ने दावा किया है कि सराफी नियमित रूप से लश्कर-ए-तैयबा में भर्ती के लिए युवाओं की पहचान और तलाश कर रहा था। बिलाल 2005 से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था, जिसे UN ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
माना जाता है कि उसने इस संगठन के लिए पैसे जुटाने, हथियार खरीदने में मदद करने और इसके आतंकवादी ऑपरेशन्स को समर्थन देने में अहम भूमिका निभाई थी। LeT का अहम सदस्य सराफी तैयबा कॉलोनी में संगठन के दूसरे बड़े कमांडरों के साथ रहता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसका काम लोगों को वैचारिक ट्रेनिंग देकर उनका ब्रेनवॉश करना था। माना जाता था कि वह तीन अन्य सीनियर कमांडरों के साथ मरकज तैयबा परिसर के अंदर रह रहा था।
सोशल मीडिया पर बिलाल की हत्या से जुड़े कई वीडियो सामने आए हैं। हालांकि, इन क्लिप्स की सच्चाई की आधिकारिक तौर पर अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। सराफी की हत्या के पीछे का कारण अभी भी साफ नहीं है। हालांकि, पाक अधिकारियों ने दावा किया है कि उसकी हत्या लश्कर-ए-तैयबा के भीतर आपसी रंजिश और असंतोष का नतीजा हो सकती है।